झारखंड की महिला उद्यमी राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की बना रही बेहतर छवि। (AI Generated Image)
आशीष झा, रांची। उद्योग के क्षेत्र में झारखंड की महिला उद्यमियों की बदौलत राष्ट्रीय फलक पर राज्य की एक बेहतर तस्वीर उभरकर आ रही है।
महिलाओं के स्तर से संचालित एमएसएमई के मामलों में झारखंड को देश में 12वां स्थान मिला है। बड़ी बात यह है कि झारखंड का स्थान बिहार से बेहतर तो है ही, नई दिल्ली, पंजाब और ओडिशा से भी बेहतर है।
यहां 3.10 लाख एमएसएमई का नेतृत्व महिला उद्यमी करती हैं। आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं कि एमएसएमई को भारतीय औद्योगिक परिक्षेत्र का मूल आधार माना जाता है।
झारखंड में संचालित 15.61 लाख एमएसएमई में से 3.10 लाख उद्यमों पर महिला उद्यमियों का मालिकाना हक है। वहीं पुरुषों की संख्या 12.50 लाख है। पुरुष उद्यमियों की संख्या अभी भले ही अधिक दिख रही है, धीरे-धीरे अंतर कम होता जा रहा है और यही कारण है कि महिला उद्यमियों की चर्चा हो रही है।
इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति में पश्चिम बंगाल है और उसके बाद तमिलनाडू का नंबर आता है। भारत सरकार के उद्यम निबंधन पोर्टल पर झारखंड में महिला आधारित उद्योगों की संख्या 82439 है।
यह राष्ट्रीय आंकड़ों के हिसाब से 1.77 प्रतिशत है। इन उद्योगों के माध्यम से लगभग 6.8 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। इतना ही नहीं, 1509 करोड़ रुपये के निवेश से संचालित इन उद्योगों का वार्षिक लेनदेन 17832 करोड़ रुपये का है।
गौरतलब है कि रोजगार देने के मामले में झारखंड का अनुपात 2.39 प्रतिशत है जबकि इकाइयों की संख्या 1.77 प्रतिशत ही है।
बिहार में निबंधित एमएसएमई की संख्या 34.08 लाख है जो कि झारखंड में निबंधित एमएसएमई से दोगुना के करीब है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल में ऐसी इकाइयों की संख्या 29.01 लाख है। देश में 6.08 करोड़ एमएसएमई निबंधित हैं जिनमें से 1.23 करोड़ एमएसएमई का स्वामित्व महिलाओं के पास है।
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