भिवानी में मौसम का अजीब मिजाज देखने को मिल रहा है (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, भिवानी। सुबह की ठंडी हवाएं अभी भी सर्दी के अहसास को जिंदा रखे हुए हैं। लोग जब अपने घरों से निकलते हैं तो स्वेटर, जैकेट और शाल में लिपटे नजर आते हैं। हल्की ठिठुरन और ठंडी हवा शरीर को सिहरा देती है। ऐसा लगता है मानो सर्दी अभी पूरी तरह विदा नहीं हुई है।
लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, मौसम अचानक करवट बदल लेता है। दोपहर होते-होते सूरज की तेज किरणें धरती को तपाने लगती हैं और गर्मी का असर साफ दिखाई देने लगता है।
दोपहर में हालात बिल्कुल उलट हो जाते हैं। लोग जो सुबह तक ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहने हुए थे, वही अब धूप और पसीने से परेशान नजर आते हैं। बाजारों और सड़कों पर चलते समय तेज धूप चुभने लगती है। कई लोग छाता या सिर पर कपड़ा रखकर धूप से बचने की कोशिश करते हैं। दफ्तरों और घरों में पंखे चलने लगते हैं।
अमन कुमार ने कहा कि सुबह घर से निकलते ही धुंध याद दिलाती है कि अभी ठंड नहीं गई है। धुंध सुबह-सुबह खेतों से होकर गुजरने वाले रास्ते के साथ-साथ बस काे भी घेर लेती है और सर्दी के एहसास को दोबारा याद दिला देती है। सर्दी से बचने के लिए घर से स्वेटर या जैकेट डालकर आइटीआइ के लिए निकलना पड़ता है, कहीं ठंड के आखरी पड़ाव में स्वास्थ्य न बिगड़ जाए।
शंकर का कहना है कि हमारा पुराने मकान तोड़ने का काम होता है, कई बार रात में भी में काम करना पड़ता है तो कई बार ठंड का एहसास हाेता है। पिछले दो दिनों से तो धुंध ने समय के भी मात दे दी है, धुंध को देखकर जनवरी जैसा महसूस हो रहा है। घर से निकलने से पहले कुछ मजबूत पहनना पड़ता है, ताकि जाती हुई ठंड से बचा जा सके।
सचिन दिनोद ने कहा कि हर रोज दिल्ली के लिए निकलना होता है। जब सुबह उठते है तो घर में सब ठीक रहता है लेकिन जैसे ही काम के लिए घर से निकलते है तो पता चलता है धुंध फैली हुई है। पिछले तीन दिन से तो धुंध जनवरी की तरह लौट आई है। रेलगाड़ी में भी कोई मजबूत कपड़ा पहन कर जाना होता है, डर रहता है कि कहीं बीमार न हो जाएं।
ड. रघुबीर शांडिल्य ने कहा कि मौसम बदल रहा है लोगो को सुबह गर्म और जरूरत के हिसाब से कपड़े पहनने चाहिए और दोपहर में पानी ज्यादा पीए ताकि शरीर में नमी बनी रहे। इन दिनों सर्दी खांसी और वायरल बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे है। |