लॉर्ड बैडेन-पॉवेल: स्काउट्स एंड गाइड्स के संस्थापक की प्रेरणादायक कहानी (Picture Credit- AI Generated)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इतिहास के पन्नों में 22 फरवरी की तारीख बेहद खास है। यह वह दिन है, जब स्काउट्स एंड गाइड्स की स्थापना करने वाले लॉर्ड बैडेन-पॉवेल का जन्म हुआ था। वह एक ब्रिटिश फौजी अफसर और लेखक थे।
आज हम पूरी दुनिया में जिस \“बॉय स्काउट्स\“ मूवमेंट को देखते हैं, उसे साल 1907 में उन्होंने ही शुरू किया था। उनका मकसद युवाओं के अंदर अनुशासन, हिम्मत और समाज सेवा की भावना जगाना था।
बचपन में ही छिन गया था पिता का साया
पॉवेल का जन्म 22 फरवरी, 1857 को लंदन में हुआ था। महज तीन साल की छोटी-सी उम्र में ही उनके पिता का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद घर की हालत कुछ ठीक नहीं थी, लेकिन बावजूद इसके उनकी मां ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया।
(Picture Credit- Instagram)
अपनी मां के कारण ही उन्होंने जंगलों में घूमना, नाव चलाना, नक्शे बनाना और नेचर को समझना सीखा। उनकी शुरुआती पढ़ाई इंग्लैंड के \“रोज हिल स्कूल\“ में हुई। बाद में उन्हें \“चार्टरहाउस स्कूल\“ में स्कॉलरशिप मिल गई। हालांकि, पॉवेल का मन शुरू से ही किताबों से ज्यादा आउटडोर एक्टिविटीज, ट्रैकिंग, म्यूजिक और एक्टिंग में लगता था।
सेना से मिली \“स्काउटिंग\“ की प्रेरणा
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 1876 में पॉवेल ने ब्रिटिश सेना ज्वाइन की और दिलचस्प बात यह है कि उस समय उन्हें पहली पोस्टिंग भारत में मिली। साल 1899 में उन्होंने \“एड्स टु स्काउटिंग\“ नाम की एक किताब लिखी थी। मुख्य रूप से फौजियों के लिए लिखी गई यह किताब आम बच्चों को भी यह बहुत पसंद आई।
उनकी इस किताब को पढ़ने के बाद बच्चे ट्रैकिंग और कैंपिंग में दिलचस्पी लेने लगे और खुद को \“बॉय स्काउट्स\“ कहने लगे। पॉवेल को समझ आ गया कि सेना की कुछ अच्छी बातों को अगर बच्चों को सिखाया जाए, तो उनका चरित्र निर्माण बहुत अच्छे से हो सकता है।
(Picture Credit- Instagram)
पहला कैंप और \“गर्ल गाइड\“ की शुरुआत
बच्चों के इसी जोश को देखकर 1907 में पॉवेल ने \“ब्राउनसी आइलैंड\“ पर 20 लड़कों का एक कैंप लगाया। इस कैंप में बच्चों को टीम वर्क और नैतिकता सिखाई गई। इसके अगले साल यानी 1908 में उन्होंने अपनी सबसे मशहूर किताब \“स्काउटिंग फॉर बॉयज\“ पब्लिश की। बाद में उन्होंने अपनी बहन एग्नेस के साथ मिलकर लड़कियों के लिए भी \“गर्ल गाइड्स\“ की शुरुआत की।
कैसे भारत पहुंचा स्काउट-गाइड?
पॉवेल की किताब \“स्काउटिंग फॉर बॉयज\“ का असर भारत तक पहुंचा और 1909 में यहां भी इसकी शुरुआत हुई। बेंगलुरु में कैप्टन टी.एच. बेकर ने पहली स्काउट टोली बनाई, लेकिन इसमें सिर्फ अंग्रेज और एंग्लो-इंडियन बच्चे ही शामिल थे।
इसके बाद 1913 में एनी बेसेंट, पंडित मदन मोहन मालवीय और विवियन बोस जैसे नेताओं ने भारतीयों के लिए अलग से स्काउटिंग गुट बनाए। बैडेन पॉवेल खुद भी 1921 और 1937 में भारत दौरे पर आए थे। भारत की आजादी के बाद 7 नवंबर, 1950 को \“द भारत स्काउट्स एंड गाइड्स\“ का आधिकारिक तौर पर गठन हुआ।
यह भी पढ़ें- जब गिटार को नहीं मिलती थी इज्जत... एक लड़के ने बिना गुरु के कैसे बदल दिया इतिहास?
यह भी पढ़ें- 114 साल पहले शुरू हुई थी दुनिया की पहली एयर मेल सेवा, कुंभ मेले के दौरान रचा था इतिहास |