प्रतीकात्मक तस्वीर
जागरण संवाददाता, बागपत। शहर के दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज में पिछले साल 22 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्तियों का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। उच्च न्यायालय ने नियुक्तियों को नियम के विरुद्ध मानते हुए उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एवं उच्च शिक्षा प्रयागराज के निदेशक तथा दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज की प्रबंध समिति के सचिव को अपना पक्ष रखने के लिए 30 मार्च को तलब किया है।
वर्ष 2025 में दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज में हुई विभिन्न विषयों के 22 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्तियां शुरू से ही विवादों में रही हैं। शिकायतकर्ता और प्रबंध समिति एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहे हैं। शिकायतकर्ता सुनील कुमार जैन ने कॉलेज की प्रबंध समिति को कालातीत बताते हुए आरोप लगाया था कि कालेज में जब प्रबंध समिति ही नहीं है तो नियुक्तियां कैसे हो सकती है।
इस मामले की चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के अलावा उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और उच्च शिक्षा प्रयागराज के निदेशक के यहां भी शिकायतें की गई थी। इसी बीच वादी पक्ष ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए इस प्रकरण में याचिका दायर की थी।
उच्च न्यायालय, प्रयागराज ने इस मामले को उच्च शिक्षा विभाग को ही देख लेने के लिए आदेश दिए थे। उधर, इसी बीच उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने नियुक्तियों पर लगी रोक हटा दी गई थी, जिसके बाद कॉलेज में सभी 22 नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।
वादी सुनील कुमार जैन ने बताया कि उच्च न्यायालय ने 18 फरवरी को एक आदेश जारी किया जिसमें दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज में पिछले साल हुई असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्तियों को नियम के विरुद्ध मानते हुए उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एवं उच्च शिक्षा प्रयागराज के निदेशक तथा दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज की प्रबंध समिति के सचिव को अपना पक्ष रखने के लिए 30 मार्च को तलब किया है। उधर, उच्च न्यायालय की कार्यवाही से संबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों में हलचल हो गई है। |
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