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हरियाणा बजट सत्र: शून्य काल के दौरान विधायकों ने सदन में रखे कई ज्वलंत मुद्दे, स्पीकर ने दिए समाधान के निर्देश

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हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हरविंद्र कल्याण। फोटो एक्स



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता तथा विपक्ष के विधायकों ने ज्वलंत मुद्दों पर सदन का ध्यान आकृष्ट किया। विधायकों की बात सुनने के बाद विधानसभा स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने संबंधित मंत्रियों से कहा कि सदन के सदस्यों की बातों पर गहनता से विचार करने के बाद समस्या दूर की जाएं।

शून्य काल के दौरान पहला सवाल समालखा के विधायक मनमोहन भड़ाना ने पानीपत, फरीदबाद, गुरुग्राम और यमुनानगर सहित उन जिलों की बात उठाई, जहां इंडस्ट्री खास कर ड्राइंग यूनिट चल रही है।

उन्होंने कहा कि पानीपत तथा समालखा की औद्योगिक इकाइयों ने निकल रहे दूषित पानी को टैंकरों के सहारे से नालों में डाला जा रहा है, जिससे यमुना भी दूषित हो रही है। दूषित पानी का खाली जगह में भी डाल दिया जाता है जिससे भूजल दूषित हो रहा है।

पीने के पानी का टीडीएस 150 होना चाहिए जो 1500 के ऊपर जा रहा है। शुद्ध पानी नहीं मिलने से वह लोग कैंसर का शिकार हो रहे जो व्यायाम कर खानपान का ध्यान रखते और कोई नशा भी नहीं करते हैं। खिलाड़ी तक कैंसर की चपेट में आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार इस समस्या को दूर करने के लिए दूषित पानी को शोधित करने के बड़े प्लांट लगाए और ऐसा प्रविधान करे कि इसका खर्च उद्यमियों से ही इंडस्ट्री की क्षमता के मुताबिक लिए जाए वह देने को भी तैयार हैं। पानी के निपटारे के लिए वह भी परेशान रहते हैं।

इनेलो के विधायक आदित्य देवीलाल ने कई सालों पहले बनी नहरों को तोड़ने की बात उठाई। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण बनी बनाई नहरों के किसान अपनी जरूरत के मुताबिक तोड़ लेते हैं।

अपनी नहर में पानी की आपूर्ति बढ़वा लेते हैं जिससे दूसरे किसान परेशान हो जाते हैं। बनी बनाई नहर का लेआउट नहीं बदलना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बने बस स्टाफ तक बसे नहीं आने का मुद्दा भी एक बार फिर से सदन में रखा।

दादरी से भाजपा विधायक सुनील सतपाल सांगवान ने क्षेत्र में वर्षा के समय होने वाले जलभराव की समस्या तथा नालों से निकलने वाले पानी को शोधित करने के लिए एसटीपी लगवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछले बजट में उनके क्षेत्र को दो आइटीआइ स्थापित कराने की घोषणा की गई लेकिन उस पर अभी काम नहीं आरंभ हुआ इसे शुरू किया जाए।
लैब टेस्ट में हो रहा फर्जीवाड़ा

आदित्य देवीलाल ने कपास की नई प्रजाति 2022 के बाद नहीं आने पर चिंता जताई। कहा हमारे पास अभी बीटी किस्म ही है जबकि अमेरिका बीटी-6 प्रजाति का उत्पादन कर रहा है। बीज तथा मिट्टी की लैब टेस्टिंग पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।

हरियाणा में पंचकूला तथा रोहतक में लैब हैं। रोहतक तथा पंचकूला लैब में एक साल में 15000 सैंपल की जांच की जा सकती है। पर हमारे पास जो रिपोर्ट हैं उसमें हर साल 25 से 30 हजार सैंपल जांच करने के दावे किए गए हैं। ऐसे में यही कह कह सकते हैं कि रिपोर्ट फर्जी तरीके से तैयार हो रही है। सरकार को संज्ञान लेने की जरूरत है।
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