काले शीशे के बढ़ रहे उपयोग को देखते हुए परिवहन विभाग उठा रहा कदम। जागरण
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। अब कार के शीशे पर लगी काली फिल्म का आकलन अंदाज से नहीं, बल्कि तकनीकी उपकरण से किया जाएगा। परिवहन विभाग ने वाहनों के शीशे की पारदर्शिता मापने के लिए ‘टिंट मीटर’ खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके माध्यम से यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि वाहन के शीशे निर्धारित मानक के अनुरूप हैं या नहीं।
परिवहन विभाग की नियमावली के अनुसार कार में यदि काले शीशे लगे होंगे तो उनमें 70 प्रतिशत पारदर्शिता होनी चाहिए। सामान्य रूप से आगे और पीछे के शीशों में उच्च दृश्यता अनिवार्य होती है, जबकि साइड विंडो पर केवल 30 प्रतिशत तक टिंट की अनुमति होती है। इससे अधिक काले शीशे प्रतिबंधित माने जाते हैं।
अब तक विभाग के पास इसे मापने का कोई वैज्ञानिक उपकरण नहीं था, जिसके चलते कई बार केवल अनुमान के आधार पर चालान किए जाते थे। इससे वाहन चालकों और प्रवर्तन टीम के बीच विवाद की स्थिति भी बनती रही।
वहीं काले शीशे के प्रयोग अपराधियों के लिए अधिक सुविधाजनक बन रहा है, इससे यह नहीं पता चलता कि वाहन के भीतर कौन बैठा हुआ है। बढ़ती शिकायतों और पारदर्शिता की आवश्यकता को देखते हुए विभाग ने तकनीकी समाधान अपनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए टिंट मीटर की खरीद की जा रही है। पहले चरण में इसके लिए 45 टिंट मीटर खरीदे जा रहे हैं जो प्रवर्तन दलों को सौंपे जाएंगे।
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उप आयुक्त परिवहन शैलेश बगौली का कहना है कि उपकरण उपलब्ध होते ही इन्हें प्रवर्तन दलों को सौंपा जाएगा। इससे एक ओर सड़क सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर बेवजह के विवाद और मनमानी की शिकायतों पर भी अंकुश लगेगा। इस व्यवस्था से कार्रवाई अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी।
क्या होता है टिंट मीटर
टिंट मीटर एक डिजिटल उपकरण होता है, जिसे शीशे पर लगाकर उसकी प्रकाश पारगम्यता (लाइट ट्रांसमिशन) का प्रतिशत तुरंत स्क्रीन पर देखा जा सकता है। इससे मौके पर ही स्पष्ट हो जाएगा कि वाहन नियमों का उल्लंघन कर रहा है या नहीं।  |
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