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JNU Protest: जेएनयू में कुलपति के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन! झड़प में कई छात्र घायल, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

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JNU Protest: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में देर रात एक विरोध मार्च के दौरान वामपंथी और दक्षिणपंथी रुझान वाले दो छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प में कई छात्र घायल हो गए। दोनों समूहों ने हिंसा के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में किसी भी तरह के अराजक व्यवहार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। जेएनयू परिसर में सोमवार देर रात करीब 1:30 बजे कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन के हिंसक रूप अख्तियार करने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।



पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (सीएसओ) की शिकायत पर FIR दर्ज की है। इसमें जेएनयूएसयू नेताओं और उनके सहयोगियों से जुड़ी एक घटना का जिक्र है। अधिकारियों ने बताया कि जांच शुरू कर दी गई है।



वामपंथी रुझान वाले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के इस्तीफे और एक निष्कासन आदेश को रद्द करने की मांग को लेकर रविवार रात को पूर्वी गेट की ओर \“समता जुलूस\“ निकालने का ऐलान किया था।




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प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मार्च में शामिल छात्रों से संवाद के बजाय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों को उनसे भिड़ने दिया। हालांकि, एबीवीपी ने आरोपों को खारिज किया। उन्होंने वाम समर्थित संगठनों पर झड़पों को भड़काने तथा घटना के बारे में गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया।



पंडित ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि समुदाय लगातार पीड़ित बने रहकर या पीड़ित होने का नाटक करके प्रगति नहीं कर सकते। इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया। जेएनयूएसयू ने पंडित की टिप्पणियों को जातिवादी और हाशिये पर पड़े समुदायों के प्रति असंवेदनशील बताया है।



लेफ्ट और राइट दोनों पक्षों ने लगाए गंभीर आरोप



वाम समर्थित छात्र संगठनों की ओर से शेयर किए गए वीडियो में नकाबपोश लोगों को परिसर में पथराव करते हुए देखा जा सकता है। वहीं, एबीवीपी की ओर से पोस्ट किए गए वीडियो में परिसर में हिंसा भड़कने से पहले कुछ नकाबपोश लोग लाठियों के साथ घूमते हुए नजर आ रहे हैं। वाम समर्थित छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि जब वे विरोध-प्रदर्शन के लिए परिसर में इकट्ठा हुए, तो एबीवीपी सदस्यों ने उन पर पथराव शुरू कर दिया।



दूसरी ओर एबीवीपी ने वाम समर्थित छात्र संगठनों के कई सदस्यों का नाम लेते हुए उन पर झड़प शुरू करने और बाद में एबीवीपी सदस्यों पर पथराव करने, यहां तक ​​कि महिला छात्रों पर हमला करने का आरोप लगाया। वहीं, जेएनयूएसयू ने आरोप लगाया कि कुलपति की जातिवादी टिप्पणियों के लिए उनकी माफी और इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों पर पत्थर और ईंटों से हमला किया गया। इसमें कई लोग घायल हो गए और कई अन्य को केंद्रीय पुस्तकालय के अंदर शरण लेनी पड़ी।



जेएनयूएसयू ने एक बयान में कई एबीवीपी सदस्यों का नाम लेते हुए उन पर हिंसक भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप लगाया। संगठन ने दावा किया कि पंडित ने विरोध-प्रदर्शन की जानकारी होने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया। बयान में कहा गया है जेएनयूएसयू ने 26 फरवरी को शिक्षा मंत्रालय तक \“लॉन्ग मार्च\“ का ऐलान किया है। बयान में छात्र संगठन ने कुलपति के इस्तीफे की अपनी मांग दोहराई है।



एक्शन में JNU प्रशासन



इस बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि उसने घटना का गंभीरता से संज्ञान लिया है। प्रशासन का कहना है कि JNU परिसर में किसी भी तरह के अराजक व्यवहार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जेएनयू प्रशासन ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के एक समूह ने परिसर के भीतर कई शैक्षणिक भवनों को कथित तौर पर बंद कर दिया था।



बयान के मुताबिक, “प्रदर्शनकारी छात्र केंद्रीय लाइब्रेरी में घुस गए और उन छात्रों को कथित तौर पर धमकाया और विरोध में शामिल होने के लिए मजबूर किया, जो इसका हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। पता चला है कि इसी वजह से 22 फरवरी की रात को परिसर में दो छात्र संगठनों के बीच झड़प हुई। जेएनयू प्रशासन ने इन परेशान करने वाली घटनाओं का गंभीर संज्ञान लिया है।“



बयान में हिंसा की निंदा करते हुए कहा गया है, “विश्वविद्यालय के नियमों और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। कक्षाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी हैं।“ इससे पहले, एबीवीपी ने दावा किया कि वाम समर्थित समूहों के वाचनालय (रीडिंग रूम) में पढ़ रहे छात्रों पर हमला करने के बाद विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गया।



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संगठन ने आरोप लगाया कि लगभग 150-200 लोगों की भीड़ ने परिसर में एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हमला किया। उसने दावा किया कि हमले के बाद कई कार्यकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हिंसा भड़काने में एबीवीपी का हाथ होने के आरोपों पर जेएनयूएसयू के पूर्व महासचिव वैभव मीणा ने दावा किया कि वामपंथी छात्रों ने देर रात के विरोध-प्रदर्शन के दौरान वाचनालयों को बंद करने की मांग की थी। जब छात्रों ने इस पर सहमति नहीं जताई, तो वे हिंसा पर उतारू हो गए।
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