बीरबल प्रसाद अब 76 साल का हो चुका है। फाइल फोटो
संवाद सहयोगी, कलेर (अरवल)। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम रवि रंजन मिश्रा की अदालत ने पत्नी की नृशंस हत्या के मामले में सेवानिवृत्त शिक्षक जिले के मेहंदिया थाना क्षेत्र के जमुहारी गांव निवासी 76 वर्षीय बीरबल प्रसाद को फांसी की सजा सुनाई है।
मामला 22 जुलाई 2024 का है, जिस दिन बीरबल प्रसाद की शादी की 57वीं सालगिरह थी। उसी दिन सेवानिवृत्त शिक्षक ने घर पर अपनी 70 वर्षीय पत्नी सुमंती सिन्हा की हत्या कर शव को 12 टुकड़ों में काट दिया था। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए कठोरतम दंड सुनाया।
अदालत ने इसे विश्वास और वैवाहिक संबंधों की मर्यादा को तार-तार करने वाला अपराध बताते हुए कहा कि यह मामला दुर्लभतम श्रेणी में आता है।
पहली पत्नी की आग लगने से हुई थी मौत
गिरफ्तारी के वक्त पुलिस की पूछताछ में आरोपित पति ने बताया था कि 1989 में उसकी पहली पत्नी की मौत आग लगने से हो गई थी, जिसके बाद चाचा दीपा साव ने किंजर थाना क्षेत्र के हाजीपुर निवासी भावनाथ साव की पुत्री सुमंती से शादी करा दी।
दोषी ने बताया कि वह शादी के लिए तैयार नहीं था, लेकिन पारिवारिक दबाव में विवाह हुआ। उस वक्त वह हजारीबाग के देनूघाट में विद्युत विभाग में कार्यरत था, बाद में शिक्षक के पद पर नियुक्ति हुई।
नौकरी के दौरान अरवल शहर में अपने पांच बेटे व बेटियों को साथ रखकर पढ़ाई कराता था, पहली पत्नी से एक बेटा व दूसरी पत्नी से तीन बेटा व एक बेटी है। पत्नी गांव में रहकर चाचा की सेवा करती थी।
चाचा के साथ अवैध संबंध का शक
सेवानिवृत्ति के बाद वह भी गांव में रहने लगा। पत्नी का अधिक समय चाचा की सेवा में लगने को लेकर उसके मन में संदेह उत्पन्न हुआ, जिसको लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। इसी के चलते साजिश रचकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया। वर्ष 2021 से पत्नी की हत्या की साजिश रच रहा था।
शादी की 57वीं सालगिरह आने पर उसने पत्नी की धारदार हथियार से हत्या कर दी और शव को 12 टूकड़ों में काट दिया था। उस दिन घर में सिर्फ एक बहू थी, जिसे कमरे में बंद कर दिया था।
बीरबल प्रसाद का एक बेटा इंजीनियर, दूसरा बीएसएफ, तीसरा शिक्षक, चौथा आटो मालिक व बेटी भी शिक्षिका है, सभी की शादियां हो चुकी हैं। बीरबल प्रसाद अभी मंडल कारा जहानाबाद में हैं।
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