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सिवनी में NH-44 पर मौत से मुकाबला : ट्रकों की आमने-सामने भिड़ंत, 3 घंटे चले रेस्क्यू के बाद बची ड्राइवर की जान

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हादसे के बाद ट्रक के केबिन में फंसा चालक।  



डिजिटल डेस्क, जबलपुर। सिवनी जिला के छपारा क्षेत्र अंतर्गत नेशनल हाईवे 44 पर बुधवार रात भीषण सड़क हादसा हो गया। रणधीर नगर और झिलमिली गांव के पास दो ट्रकों की आमने-सामने टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक ट्रक का चालक केबिन में बुरी तरह फंस गया। करीब तीन घंटे तक चले कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद चालक को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।
वाहनों की लगी कतार

हादसे के बाद हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम हटवाने और यातायात बहाल करने में पुलिस को रात दो बजे तक मशक्कत करनी पड़ी। दुर्घटना बुधवार की शाम करीब सात बजे हुई। जानकारी के मुताबिक, ग्वालियर से ट्रक लेकर चालक अरविंद यादव अपने पिता धनीराम यादव के साथ जा रहा था। झिलमिली गांव के पास क्रॉसिंग से गांव की सड़क से एक अन्य ट्रक हाईवे पर आ गया, जिससे दोनों वाहनों में जोरदार भिड़ंत हो गई।
केबिन में फंसे चालक को निकालने में जद्दोजहद

टक्कर के बाद अरविंद यादव स्टेयरिंग और केबिन के बीच बुरी तरह दब गया। मौके पर पहुंची 108 एंबुलेंस के स्टाफ प्रतुल श्रीवास्तव और स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया। पिता धनीराम को मामूली चोटें आईं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिए छपारा भेजा गया, जबकि अरविंद को निकालने के लिए पुलिस और प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ी।

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तीन थानों की पुलिस ने संभाला मोर्चा

इधर, हादसे के बाद एनएच-44 फोरलेन पर वाहन निकालने की होड़ में गलत दिशा से गाड़ियां आने लगीं, जिससे दोनों ओर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। हालात संभालने के लिए छपारा, बंडोल और लखनादौन थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचा।

लखनादौन के एसडीओपी अपूर्व भलावी के नेतृत्व में पुलिस दल ने रात दो बजे तक जाम हटवाकर यातायात सुचारू किया। लगभग तीन घंटे चले रेस्क्यू के बाद रात 11 बजे चालक अरविंद को सुरक्षित बाहर निकालकर गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।
एक्सीडेंट मैनेजमेंट पर फिर उठे सवाल

हादसे के बाद फोरलेन पर दुर्घटना प्रबंधन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से अधिकृत एजेंसी के कर्मचारी उपकरणों के साथ मौके पर पहुंचे जरूर, लेकिन दो क्रेनों की मदद से भी चालक को बाहर निकालने में करीब तीन घंटे लग गए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये का टोल वसूले जाने के बावजूद आपात स्थितियों से निपटने के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। कुछ दिन पहले मड़ई घाटी में ऐसे ही हादसे में देरी से रेस्क्यू के कारण एक चालक की जान चली गई थी। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि एनएच-44 पर रोजाना 8 से 10 हजार वाहनों की आवाजाही को देखते हुए आपातकालीन सेवाओं और एक्सीडेंट मैनेजमेंट को तत्काल मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हालात दोबारा न बनें।   
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