नोएडा - ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे बसे सेक्टरों को जोड़ने वाली सड़क पर नहीं लगा है सीसीटीवी कैमरा। जागरण
मुनीश शर्मा, नोएडा। यूपी के शो विंडो कहे जाने वाले हाईटेक नोएडा में शत प्रतिशत सड़कें सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में नहीं हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर कंट्रोल रूम तैयार किया, लेकिन अंदरूनी और सर्विस लेन कैमरों के दायरे में नहीं हैं। कई बार सामने आता है कि अपराधी इसी बात का फायदा मिलता हैं। अपराध होने पर अपराधी बच निकलता है।
फिर बात सेक्टर 145 के डंपिंग ग्रांउड में युवती का शव मिलना हो या सेक्टर 108 में नाले में सिर व हाथ कटी लाश मिलने की हो। कई घटनाओं की अभी तक गुत्थी नहीं सुलझी है। इसी तरह पुलिस ने इंजीनियर की मौत के मामले में गुरुग्राम से नोएडा आने की जानकारी दी, लेकिन सेक्टर 150 स्थित घटनास्थल के आसपास का कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है।
नोएडा में 167 सेक्टर हैं। अधिकांश सेक्टर बस चुके हैं। यहां पर आईटी कंपनी से लेकर नामी कंपनियों के कार्यालय व फैक्ट्री परिसर हैं। कई जगह ऐसी हैं जहां पर दिन रात काम होता है। साथ ही नोएडा में कामगारों से लेकर हाइ प्रोफाइल लोगों के अलावा हस्तियां भी रहती हैं। गौतमबुद्ध नगर प्राधिकरण कूड़ा उठाने से लेकर सभी गतिविधियों की 567 सर्विलांस और 717 एएनपीआर कैमरों से निगरानी करने का दावा करता है, लेकिन अभी भी सबसे बड़ा सवाल यह है कि यहां के वांशिदे कितने सुरक्षित हैं।
एक्सप्रेसवे से लेकर शहर तक की आइटीएमएस कैमरों से निगरानी हो रही है। उसके बराबर की सर्विस लेन, 45 व 60 मीटर चौड़ी सड़क पर सीसीटीवी नहीं हैं। हालांकि जिम्मेदारों की ओर से प्रवेश व अंत तक कैमरे लगने का दावा करते हैं, लेकिन कोई सड़क में बीच से प्रवेश करे या निकल जाए तो इसका पता लगाने में जिम्मेदार खाली हाथ नजर आते हैं।
नहीं मिली फुटेज
नोएडा सेक्टर 145 स्थित डंपिंग यार्ड के कूड़े में 28 दिसंबर को एक बैग के अंदर युवती का शव मिला। युवती के हाथ-पैर बंधे हुए और चेहरे पर जलने के निशान मिले। सेक्टर 142 थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया तो गला दबाकर मौत होने आया, लेकिन अभी तक भी पुलिस युवती की पहचान और उसके हत्यारोपितों का पता नहीं हुई है। यहां तक कि पुलिस इस बात को लेकर भी खाली हाथ है कि शव वहां तक कैसे पहुंचा। |
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