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Budget 2026: वैश्विक व्यापार, मैन्यूफैक्चरिंग और MSMI... आगामी बजट को लेकर क्या है मोदी सरकार का प्लान?

cy520520 2025-11-26 02:37:41 views 1257
  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)



राजीव कुमार, नई दिल्ली। इस बार गणतंत्र दिवस पर समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत की झांकी देखने को मिलेगी और कमोबेश इसी थीम पर आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को भी पेश किया जा सकता है। खास कर मैन्यूफैक्चरिंग में कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों तक में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश की जाएगी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

वैश्विक व्यापार की दुनिया में आए दिन एक-दूसरे को माल नहीं देने की घोषणा और विभिन्न प्रकार की व्यापार बंदी को देखते हुए उन सभी चीजों को घरेलू स्तर पर ही तैयार करने की कोशिश की जाएगी जिसके लिए भारत किसी खास देश पर निर्भर करता है। इस काम में मदद के लिए बजट में कई घोषणाएं की जा सकती हैं। नई यूनिट लगाने, पुरानी यूनिट का क्षमता विस्तार और निर्माण लागत कम करने के लिए आगामी एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में विभिन्न प्रकार के इंसेंटिव देखने को मिल सकते हैं।
क्या है मोदी सरकार का प्लान?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पिछले सप्ताह विभिन्न औद्योगिक संगठनों, बाजार विशेषज्ञ, एमएसएमई व अन्य स्टेक होल्डर्स के साथ बजट पूर्व चर्चा कर चुकी है।

सूत्रों का कहना है कि विकसित भारत को नारे के स्तर से आगे ले जाने की दिशा में पहले ही काम शुरू हो चुका है। बजट में विकसित भारत के निर्माण को देखते हुए सभी सेक्टर के लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी और उसी हिसाब से वित्तीय आवंटन भी होगा। विकसित भारत के निर्माण के लिए हमें अपनी विकास दर को कम से कम वर्तमान के सात प्रतिशत के स्तर को हर हाल में कायम रखना होगा जो मैन्यूफैक्च¨रग में बढ़ोतरी के बगैर संभव नहीं दिख रहा है।

घरेलू अर्थव्यवस्था में खपत को बनाए रखने के लिए रोजगारपरक को बढ़ाना ही होगा जिसमें सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मैग्नेट, क्वांटम कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिक वाहन जैसे नए जमाने के निर्माण से जुड़े कच्चे माल को तैयार करने पर बजट में विशेष बल दिया जा सकता है। रोजगार सृजन के लिए सरकार पिछले कई सालों से इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर भी काफी खर्च कर रही है और हर साल कमोबेश 10 प्रतिशत की दर से इसके आवंटन में इजाफा हो रहा है।

वर्ष 2015 में मेक इन इंडिया की शुरुआत के बाद वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत के तहत दर्जन भर से अधिक सेक्टर में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव की घोषणा की गई। इनमें सबसे अधिक इलेक्ट्रॉनिक्स तो फार्मा व कुछ अन्य सेक्टर में मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ाने में निश्चित रूप से मदद मिली, लेकिन कई व्हाइट लेबल गुड्स का निर्माण अब भी आशा के अनुरूप शुरू नहीं हो सका।
मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ाने पर दिया जाएगा बल

सूत्रों का कहना है कि इस बार के बजट में एक बार फिर से मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ाने पर अतिरिक्त बल दिया जाएगा। जानकारों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में इनकम टैक्स में सभी वर्ग को राहत दी गई, स्लैब में बदलाव किया गया। उसके बाद सितंबर में जीएसटी के स्लैब बदले गए और दरों में कटौती की गई।

पिछले सप्ताह कई सालों से लंबित श्रम संहिता को लागू करने की अधिसूचना जारी की गई। कारोबार को और आसान बनाने के लिए जन विश्वास बिल का अगला चरण सरकार जल्द ला रही है। इस प्रकार मैन्यूफैक्चरिंग प्रोत्साहन का आधार लगातार तैयार किया जा रहा है, अब मैन्यूफैक्चरिंग को पंख देने की कोशिश की जाएगी।

यह भी पढ़ें: 1 दिसंबर से शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दी जानकारी
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