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तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में चौकी सुकुलदेहन क्षेत्र में दर्ज मतांतरण से जुड़े प्रकरण की जांच में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जांच में स्पष्ट हुआ है कि संबंधित संगठन के पदाधिकारियों को पाल कोडनेम दिया गया था। जमीनी स्तर पर सक्रिय इन सदस्यों को ट्रैवल वाउचर्स के माध्यम से भुगतान किया जाता था, जो इस बात का संकेत है कि यह व्यवस्था सामान्य धार्मिक गतिविधियों से कहीं अधिक सुनियोजित और संगठित है।
आठ जनवरी को ग्राम धर्मापुर में मिशनरी डेविड चाको के खिलाफ आश्रम/चर्च संचालन, नाबालिग बच्चों को रखने और कथित मतांतरण गतिविधियों के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपित के अधीन कार्यरत कुछ खास संचालकों को संगठन के भीतर पाल कोडनेम से पहचाना जाता था।
दिए जाते थे ट्रैवल वाउचर्स
इन व्यक्तियों को यात्रा और अन्य गतिविधियों के लिए ट्रैवल वाउचर्स प्रदान किए जाते थे। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि ये वाउचर्स ऑनलाइन क्लेम किए जाते थे या नकद भुगतान होता था और इसके लिए धनराशि का स्त्रोत क्या था।
किताबें भी की गई जब्त
पुलिस के अनुसार, इंडिया पेंटाकोस्टल चर्च (आईपीसी) संगठन से जुड़े जोनल कमांडर, जोनल लीडर और अन्य उच्च पदस्थ पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ की जाएगी। जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण और संदिग्ध प्रशिक्षण मॉड्यूल से संबंधित पुस्तकें जब्त की गई हैं। इन पुस्तकों में प्रयुक्त शब्दावली, उनके अर्थ और प्रचार की मंशा को लेकर पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है।
आरोपित से अमेरिका में अध्यापन के बाद भारत लौटने पर प्राप्त कथित धनराशि को लेकर पूछताछ जारी है। जांच का फोकस इस बात पर है कि यह राशि किस माध्यम से भारत लाई गई, किस खाते से किस खाते में स्थानांतरित हुई और डालर को किस प्रक्रिया से अन्य स्वरूप में बदला गया।
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