स्मॉग के बीच गुजरते वाहन। फाइल फोटो- जागरण
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। गुरुग्राम और मानेसर में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर खतरनाक स्तर छू लिया है। खास बात यह है कि नए साल में अब तक एक दिन भी हवा साफ नहीं रही। मंगलवार सुबह 11 बजे गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 393 दर्ज किया गया, जबकि मानेसर में यह 337 तक पहुंच गया।
दोनों ही शहरों में हवा बेहद गंभीर श्रेणी में बनी हुई है। लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं हो रही हैं। सुबह से धूप खिली रहने के बावजूद हवा की गति कम रहने से प्रदूषण छंट नहीं पाया।
शहर और औद्योगिक क्षेत्रों में ढाबों पर तंदूर जल रहे हैं। इनमें लकड़ियां और कोयले का उपयोग किया जा रहा है, जिससे निकलने वाला धुआं हवा को और जहरीला बना रहा है। नियमों के बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं रही है।
टूटी सड़कों से उड़ती धूल भी प्रदूषण का बड़ा कारण बनी हुई है। सेक्टर 38, सेक्टर 46, पटौदी रोड और बसई रोड की हालत काफी खराब है। दिनभर वाहनों की आवाजाही के दौरान इन सड़कों से धूल के गुबार उठते रहते हैं। पटौदी रोड एचएसआइआइडीसी और बसई रोड जीएमडीए के अधीन होने के बावजूद मरम्मत और धूल नियंत्रण के इंतजाम नाकाफी हैं।
खुले में जला रहे कूड़ा
इसके अलावा कई इलाकों में खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है। मानेसर के औद्योगिक क्षेत्रों में इंडस्ट्रियल वेस्ट में आग लगाई जा रही है। इससे निकलने वाला जहरीला धुआं आसपास के रिहायशी इलाकों तक फैल रहा है और हालात को और बिगाड़ रहा है।
ग्रेप-चार के नियम लागू होने के बावजूद निर्माण कार्यों में लापरवाही देखी जा रही है। कई निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदूषण के स्रोतों पर सख्ती नहीं बरती गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। |
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