LHC0088 • Yesterday 23:26 • views 376
सांकेतिक तस्वीर।
अश्वनी त्रिपाठी, जागरण देहरादून। एक पीर फकीर की एक ही मजार बनती है, लेकिन उत्तराखंड में सैय्यद, भूरे शाह और कालू सैय्यद की कई मजारें पाई गई हैं।
जनसांख्यिकीय अतिक्रमण की तह में पहुंची राज्य सरकार की जांच में यह सामने आया तो हर कोई हैरत में है। पर्दाफाश हुआ कि यह कार्य सरकारी भूमि को कब्जाने के लिए किया गया।
बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि को वक्फ में दर्ज कराकर बाहरी लोगों को अवैध रूप से बसाया गया। तथ्यों के अनुसार, यूपी के दस्तावेजों से इधर आईं करीब दो हजार वक्फ संपत्तियां पिछले 25 वर्षों में ढाई गुना बढ़ चुकी हैं।
सरकार की गोपनीय जांच में सामने आया है कि वक्फ बोर्ड में 725 मस्जिदें और 769 कब्रिस्तान दर्ज हैं। यह भी संज्ञान में आया कि लगभग इतनी ही मस्जिदें अभी वक्फ बोर्ड में दर्ज नहीं है।
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली तस्वीर मजारों को लेकर सामने आई है। राज्य में 203 मजारें और दरगाहें वक्फ बोर्ड में दर्ज की गई है। इनमें ज्यादातर सरकारी भूमि पर कब्जा करके वक्फ में दर्ज कराने का पर्दाफाश हुआ है।
अब तक प्रदेश सरकार 572 अवैध मजारों को ध्वस्त करा चुकी है। ये सभी मजारें वक्फ में दर्ज नहीं थीं। अब तक हटाई गई मजारों की मिट्टी में कोई मानव अवशेष अथवा किसी प्रकार के अन्य अवशेषी अंग भी नहीं निकले।
इससे जांच टीम का सरकारी भूमि को कब्जाने के प्रयासों का संदेह पुख्ता हुआ है। अभी भी उत्तराखंड में सरकारी अथवा निजी भूमि पर अतिक्रमण कर करीब 300 से अधिक मजारें बनाने की रिपोर्ट जांच टीम ने सरकार को दी है।
अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत 11 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि खाली कराई गई है। एक नाम से कई मजारें कैसे हो सकती हैं। सवाल यह है कि कोई पीर फकीर है उसे एक ही जगह तो दफनाया गया होगा। यह खेल देवभूमि में नहीं चलेगा। हमारी सरकार कानूनी रूप से विधि सम्मत तरीके से यह जांच पड़ताल करवा रही है कि सरकारी भूमि पर आखिर कैसे, किसने और क्यों अवैध कब्जे किए। यह भी देख रही है कि ये किस आधार पर वक्फ की संपत्ति बन गए।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
यह भी पढ़ें- आधी रात अवैध मजार पर चला Bulldozer, देहरादून में सरकारी जमीन से हटाया गया अतिक्रमण
यह भी पढ़ें- सुबह-सुबह गरजा सीएम धामी का बुलडोजर: गदरपुर में सरकारी जमीन पर बनी अवैध मजार ध्वस्त, तैनात रहा भारी पुलिसबल |
|