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आगरा में पुलिस की लापरवाही: बिना गिरफ्तारी कोर्ट में रिमांड लेने पहुंच गए दारोगा, मिल गया कार्रवाई का लेटर!

Chikheang 10 hour(s) ago views 418
  

सांकेतिक तस्वीर।



जागरण संवाददाता, आगरा। कमिश्नरेट में पुलिसकर्मियों को कानून के पाठ पढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन कुछ पुलिसकर्मी तो पहला पाठ भी नहीं पढ़ सके हैं। शाहगंज में हुई फायरिंग के मामले में विवेचक ने लापरवाही की सारी हदें पार कर दीं। केस डायरी में गिरफ्तारी का पर्चा काटे बिना और गिरफ्तारी प्रपत्र भरे बिना ही चौकी प्रभारी विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में आरोपित को लेकर रिमांड लेने पहुंच गए।

न्यायालय ने पत्रावली देखने के बाद रिमांड को विधि विरुद्ध बताते हुए रिमांड अस्वीकृत कर दी। साथ ही विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा है।  
शाहगंज में रिटायर्ड दारोगा के बेटे और भतीजे को गोली मारने के मामले में किया था गिरफ्तार

शाहगंज क्षेत्र की इंद्रा कॉलोनी में 11 जनवरी की रात को हिस्ट्रीशीटरों के गैंग ने रिटायर्ड दारोगा सुरेंद्र सिंह के बेटे राघवेंद्र और भतीजे तरुण को गोली मार दी थी। इस मामले में सुरेंद्र सिंह ने शाहगंज थाने में विनय प्रताप उफ वीपी, शारिक, अनस, प्रिंस समेत अन्य के खिलाफ जानलेवा हमला व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया था। जगदीशपुरा पुलिस ने 16 जनवरी को मिढ़ाकुर निवासी दानिश को तमंचे के साथ गिरफ्तार किया। शाहगंज में फायरिंग के आरोपित हिस्ट्रीशीटरों को संरक्षण भी उसने दिया था।
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने रिमांड खारिज करते हुए चौकी प्रभारी पर कार्रवाई को भेजा पत्र

जगदीशपुरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से रिमांड स्वीकृत हो गया। इसी बीच शाहगंज थाना पुलिस द्वारा फायरिंग मामले की साजिश में शामिल सोरों कटरा निवासी नवाजिस को लेकर चौकी प्रभारी शाहगंज डिवीजन अक्षय राणा भी कोर्ट पहुंच गए। उन्होंने नवाजिस के साथ जगदीशपुरा पुलिस से दानिश को भी अपने कब्जे में ले लिया। क्योंकि उसने भी पूछताछ में पुलिस को शाहगंज की घटना में शामिल रहने की जानकारी दी थी।
गिरफ्तारी प्रपत्र भी नहीं भरा और न कारण बताया

दोनों आरोपितों को लेकर वे विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अचल प्रताप सिंह की कोर्ट में लेकर पहुंच गए। मगर, उन्होंने केस डायरी दानिश की गिरफ्तारी को कोई पर्चा नहीं काटा था। गिरफ्तारी प्रपत्र भी नहीं भरा और न ही दानिश को गिरफ्तारी का कारण बताया था। कोर्ट ने इस मामले को अवैधानिक मानते हुए कहा कि विवेचक ने विधि व्यवस्था में दिए गए सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। विवेचक द्वारा व विवेचना में घोर लापरवाही बरती गई है। अगर रिमांड हेतु प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर रिमांड दिया जाता है तो यह विधि विरुद्ध होगा।
कोर्ट ने दिए दानिश को रिहा करने के आदेश

कोर्ट ने दानिश को रिमांड अस्वीकृत कर उसे रिहा करने के आदेश दिए। जबकि नवाजिश का रिमांड स्वीकृत करते हुए न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस ने जगदीशपुरा में दर्ज आर्म्स एक्ट के मुकदमे में दानिश को और शाहगंज में दर्ज जानलेवा हमले की साजिश के मामले में नवाजिश को जेल भेज दिया।
क्राइम मीटिंग में न्यायिक अधिकारियों ने पढ़ाया कानून का पाठ

कमिश्नरेट आगरा में रिमांड अस्वीकृत होने के पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं। सोमवार को अपर पुलिस आयुक्त रामबदन सिंह ने पुलिस लाइन में थाना प्रभारियों की क्राइम ीमीटिंग की। इसमें न्यायिक अधिकारी भी बुलाए गए थे। न्यायिक अधिकारियों ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि अक्सर विवेचक कौन सी लापरवाही लिखापढ़ी में कर रहे हैं, जिसके कारण रिमांड अस्वीकृत हो रहे हैं।
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