जागरण संवाददाता, रायबरेली। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने ग्राहक को पूरा दुर्घटना बीमा देने से इंकार किया। ग्राहक ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। फाेरम में बीमा कंपनी को आदेश दिया कि ग्राहक को एक लाख 40 हजार का भुगतान करे। इसके अतिरिक्त एक हजार रुपये क्षतिपूर्ति व एक हजार वाद व्यय भी दे।
यह है पूरा मामला
विकास नगर निवासी अभिषेक शुक्ला ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर बताया कि एक निजी उपयोग के लिए एक गाड़ी खरीदी, जिसका एक साल का बीमा था। वादी द्वारा प्रीमियम का पूरा भुगतान किया गया। वादी की गाड़ी बीमा अवधि में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इसकी सूचना तत्काल बीमा कंपनी को दी और भुगतान के लिए अनुरोध किया।
सर्वेयर ने जांच कर वादी से गाड़ी की मरम्मत कराकर बिल भेजने के लिए कहा। वादी ने गाड़ी की मरम्मत कराकर एक लाख 45 हजार का बिल कंपनी को दिया। बीमा कंपनी ने वादी के बिल को नकारते हुए मात्र 80 हजार भुगतान की बात कही। वादी ने मरम्मत संबंधी सभी बिल व दस्तावेज दिखाए, लेकिन बीमा कंपनी ने अतिरिक्त भुगतान से इनकार कर दिया।
वादी ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। नोटिस तामील कराई गई। बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने कहा कि वादी ने बताया कि गाड़ी शहर के कैनाल रोड़ पर दुर्घटनाग्रस्त हुई है, जबकि गाड़ी अन्य कहीं पाई गई। गाड़ी की मरम्मत इनोवा के पंजीकृत सर्विस सेंटर पर नहीं कराई गई।
अधिवक्ता ने कहा कि कंपनी द्वारा वादी के बिल को अन्य सर्विस सेंटर से जांच कराई गई, उसमें भी 80 हजार ही खर्च आ रहा है। इसके लिए कंपनी ने वादी को पत्र जारी किया, लेकिन ग्राहक द्वारा पत्र का जवाब नहीं दिया गया।
वादी के अधिवक्ता ने कहा कि बीमा कंपनी के सर्वेयर द्वारा गाड़ी की जांच के बाद कहा था कि मरम्मत का पूरा भुगतान होगा। सर्वेयर द्वारा किसी विशेष सर्विस सेंटर की बात नहीं कही गई।
उपभोक्ता फाेरम के अध्यक्ष मदन लाल निगम, सदस्य सुनीता मिश्र व प्रतिमा सिंह ने दाेनों अधिवक्ताओं की जिरह सुनने के बाद वादी के हक में फैसला सुनाया। बीमा कंपनी को एक लाख 42 हजार के भुगतान का आदेश दिया। |
|