क्षतिग्रस नल दिखाती महिला। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, भागलपुर। सबौर प्रखंड मुख्यालय की खानकित्ता पंचायत के महादलित बहुल चार वार्डों में घर-घर नल से जल पहुंचाने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना दिखावा मात्र बनी हुई है। पंचायत के वार्ड संख्या दो, तीन, छह और सात में पिछले डेढ़ वर्ष से नल से एक बूंद पानी नहीं आया है। इससे वहां के लोगों को जल का इंतजाम करने के लिए जगह जगह भटकने पड़ रहे हैं।
यह स्थिति वहां पीएचईडी विभाग की घोर उदासीनता के कारण बनी हुई है। ग्रामीणों की ओर से जगह-जगह कटी फटी जलापूर्ति पाइप की मरम्मत किए जाने की बारंबार गुहार लगाने के बाद भी विभागीय पदाधिकारी निष्क्रिय बने हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार कहीं पाइप क्षतिग्रस्त है, तो कहीं पाइप ही नदारद है। इन चारों वार्डों में महादलित और अल्पसंख्यक बीपीएल परिवारों के लोग रहते हैं।
करीब पांच सौ परिवारों को हर दिन पानी के लिए हाय-तौबा करनी पड़ती है। मजबूरी में लोग दूर-दराज से चापाकल का गंदा और असुरक्षित पानी ढोकर ला रहे हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलापूर्ति पंप तो लगा है, लेकिन उससे मुश्किल से दस घरों तक ही पानी पहुंच पाता है। शेष इलाका पूरी तरह प्यासा है। पाइपलाइन की मरम्मत या पुनर्बहाली की दिशा में विभाग ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
इस संबंध में मुखिया सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि वे पिछले डेढ़ वर्ष से विभागीय अधिकारियों से लेकर जिलाधिकारी तक इस समस्या के समाधान के लिए गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं। कई बार स्थानीय जेई से भी बात हुई, लेकिन समाधान तो दूर, अब तक कोई अधिकारी स्थल निरीक्षण करने तक नहीं पहुंचे हैं।
इससे पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा भी यहां के चार वार्डों के गरीब परिवारों को मयस्सर नहीं हो पा रही है। मुखिया का कहना है कि रोज ग्रामीण पानी की समस्या लेकर उनके पास आते हैं, लेकिन जब विभाग ही आंख मूंदे बैठा हो तो समाधान कैसे निकले। |