सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, मथुरा। एडीजे एफटीसी प्रथम (महिला विरुद्ध अपराध) विजय कुमार सिंह ने दहेज की खातिर गर्भवती पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को आजीवन करावास, जेठ को दस वर्ष व सास और ससुर को सात-सात वर्ष के कारावास तथा 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुभाष चतुर्वेदी द्वारा की गई।
सेवर भरतपुर निवासी राजेंद्र कुमार ने अपनी बेटी ममता उर्फ हेमलता की शादी एक दिसंबर 2019 को ग्राम लठाकुरी थाना मगोर्रा निवासी विजय के साथ की थी। शादी के बाद से ससुराल वाले ममता उर्फ हेमलता से अतिरिक्त दहेज की मांग करने लगे। दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर ममता को ससुराल वाले परेशान करते थे।
12 नवंबर 2020 को बेटी की ससुराल से फोन आया कि उसकी तबीयत खराब है। पिता सहित अन्य लोगों ने गांव आकर देखा तो छत पर कमरे के बाहर ममता उर्फ हेमलता पूरी तरह जली हुई मृतावस्था में पड़ी मिली। पिता राजेंद्र ने पति विजय, ससुर रामकिशन, जेठ गजाधर व सास रामामूर्ति के खिलाफ मगोर्रा थाने में दहेज की खातिर बेटी को जला कर मारने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट में कहा गया था कि जिस समय ममता उर्फ हेमलता को जिंदा जलाया गया तब वह छह माह की गर्भवती थी। पुलिस ने नामजद आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। एडीजीसी सुभाष चतुर्वेदी ने बताया कि अदालत ने पति विजय, जेठ गजाधर, ससुर रामकिशन व सास रामामूर्ति को दोषी करार दिया।
अदालत ने पति को आजीवन कारावास, जेठ को दस वर्ष, सास व ससुर को सात-सात वर्ष के कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। सभी दोषी जमानत पर थे। निर्णय सुनाए जाने के बाद अदालत ने सभी का सजाई वारंट बना उन्हें सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया। |