नोएडा के सेक्टर 150 में जिस 90 डिग्री मोड़ पर जानलेवा हादसा हुआ था उसे सड़क सुरक्षा समिति ने दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित कर दिया था। प्रतीकात्मक तस्वीर
अर्पित त्रिपाठी, ग्रेटर नोएडा। नोएडा के सेक्टर 150 में जिस 90 डिग्री मोड़ पर जानलेवा हादसा हुआ था उसे सड़क सुरक्षा समिति ने दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित कर दिया था। समिति की दिसंबर के आखिरी सप्ताह में हुई बैठक में इस मोड़ पर दुर्घटना रोकने के लिए क्या-क्या प्रभावी कदम उठाने चाहिए, इसकी रिपोर्ट बना कर नोएडा प्राधिकरण को सौंपने का दावा किया, लेकिन प्राधिकरण ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए।
सिर्फ बैठकों तक सीमित
प्राधिकरण का दावा है कि समिति की ओर से कोई रिपोर्ट नहीं दी गई। यहां तक कि 30 दिसंबर को मोड़ पर जो ट्रक गिरा था, उसकी रिपोर्ट भी अब तक यातायात पुलिस की ओर से नहीं दी गई। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस कदर विभागों के बीच सामंजस्य की कमी है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश पर गठित हुई समिति और शासन द्वारा समय समय पर दिए गए निर्देश किस तरह सिर्फ बैठकों तक सीमित रह जाते हैं, इसका सटीक उदाहरण है।
एक किमी पहले से देनी होती है चेतावनी
कोई जगह जब दुर्घटना संभावित स्थान चिह्नित होता है तो उसके एक किलोमीटर पहले से चेतावनी के जानकारी वाहन चालकों को देनी होती है। एक दिशा सूचक बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, बैरिकेड आदि का इंतजाम करना होता है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं किया गया।
पूर्व में हुए हादसे में भी नहीं ली सबक
17 जून 2025 की रात गौर चौक पर निर्माणाधीन अंडरपास में एक बाइक गिर गई थी। घटना में एक युवक व युवती की मौत हो गई थी। सुरक्षा के इंतजाम और चेतावनी देते बोर्ड नहीं लगाई गए थे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यातायात विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे, जिसके बाद घटनास्थल के 500 मीटर पहले से चेतावनी बोर्ड लगाए गए, अंडरपास से पहले बैरिकेड, स्पीड ब्रेकर आदि के इंतजाम किए गए। लेकिन सेक्टर 150 के 90 डिग्री घातक मोड़ पर सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
समिति का काम ऐसे क्षेत्र की तलाश और सुधार
सड़क सुरक्षा समिति की हर माह बैठक होती है। इसके अध्यक्ष जिलाधिकारी होते हैं। बैठक में तीनों प्राधिकरण, यातायात पुलिस, परिवहन विभाग, परिवहन निगम, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग, डीआइओएस, बिजली निगम, सीडीओ आदि विभाग के अधिकारी शामिल होते हैं। समिति ब्लैक स्पाट को चिह्नित करने और उसमें सुधार, रोड डिजाइनिंग, जागरूकता अभियान, प्रवर्तन कार्रवाई, आदि पर रिपोर्ट तैयार कर सड़क सुरक्षा के इंतजाम करती है।
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