फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान जवान। (फोटो सौडन्य - पीटीआई)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस 2026 की परेड इस बार केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि विरासत, समर्पण और नई पीढ़ी के नेतृत्व का भी प्रतीक बनेगी। कर्तव्य पथ पर कदमताल करने जा रहे कई कंटिंजेंट कमांडर ऐसे हैं, जिनके परिवार की कई पीढ़ियां सेना में सेवा दे चुकी हैं।
पिता के नक्शे-कदम पर लेफ्टिनेंट अमित चौधरी
अरुणाचल स्काउट्स के लेफ्टिनेंट अमित चौधरी के लिए यह परेड एक भावनात्मक पल है। दूसरी पीढ़ी के सेना अधिकारी अमित के पिता 1990 में ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स कंटिंजेंट के साथ गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा रह चुके हैं।
अमित कहते हैं, “बचपन में टीवी पर परेड देखकर मैं घर में ही मार्च करता था। आज उसी कर्तव्य पथ पर अपने कंटिंजेंट का नेतृत्व करना गर्व की बात है।” शुक्रवार को हुई फुल ड्रेस रिहर्सल में उन्होंने अपने साथियों के साथ बारिश के बीच हिस्सा लिया। उनका कंटिंजेंट विशेष मल्टी-लेयर सूट, खास बूट्स और पोलराइज्ड सनग्लासेस में नजर आएगा, जो दुर्गम और कठोर मौसम के लिए डिजाइन किए गए हैं।
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‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित विशेष सेना झांकी
दिल्ली एरिया के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल नवराज़ ढिल्लों के मुताबिक, इस बार सेना की एक विशेष झांकी “इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर” थीम पर आधारित होगी, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को स्मरण करते हुए सेना की रणनीतिक योजना प्रक्रिया को प्रदर्शित करेगी।
परेड में अरुणाचल स्काउट्स के मिश्रित कंटिंजेंट के अलावा राजपूत रेजिमेंट, असम रेजिमेंट, जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री, रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी और भैरव बटालियन के मार्चिंग दस्ते भी हिस्सा लेंगे।
चौथी पीढ़ी की अधिकारी कैप्टन समीरा बुट्टर
इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर कंटिंजेंट का नेतृत्व कर रहीं कैप्टन समीरा ज़ेड बुट्टर चौथी पीढ़ी की सेना अधिकारी हैं। उनके पिता, दादा और परदादा सभी सेना में रह चुके हैं। उनके दादा ब्रिगेडियर संपूरण सिंह 1965 के युद्ध में लड़े थे और उन्हें महावीर चक्र व वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
समीरा कहती हैं, “कर्तव्य पथ पर चलना मेरे लिए गर्व और विनम्रता का क्षण है। हमारी झांकी दर्शकों के लिए एक खास सरप्राइज होगी।”
61 कैवेलरी पहली बार बैटल गियर में
26 वर्षीय कैप्टन अहान कुमार इस बार प्रतिष्ठित 61 कैवेलरी का नेतृत्व करेंगे। वे अपने घोड़े ‘रणवीर’ पर सवार होकर परेड में शामिल होंगे। उनके दादा युद्ध वीर रहे हैं, जबकि उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार, जीओसी दिल्ली एरिया, इस बार परेड कमांडर होंगे।
कैप्टन अहान ने बताया, “पिछले साल हम सेरेमोनियल यूनिफॉर्म में थे, इस बार हम बैटल गियर में नजर आएंगे। यह बिल्कुल नया अनुभव है।”
खास बात यह है कि पहली बार 61 कैवेलरी के जवान युद्धक पोशाक में दिखेंगे और प्रमुख स्वदेशी सैन्य प्लेटफॉर्म ‘फेज्ड बैटल एरे फॉर्मेशन’ में कर्तव्य पथ से गुजरेंगे।
अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन
इस बार परेड में ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल सिस्टम, एमआरएसएएम, एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS), धनुष तोप, शक्तिबाण रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी, यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ‘सूर्यास्त्र’, मानव रहित ग्राउंड व्हीकल्स और विभिन्न ड्रोन प्लेटफॉर्म का प्रदर्शन होगा।
कैप्टन विकास यादव, जो 1 गोरखा राइफल्स की चौथी बटालियन में तैनात हैं, मानव रहित ग्राउंड व्हीकल्स वाले कंटिंजेंट का नेतृत्व करेंगे। वे बताते हैं कि ये वाहन निगरानी, लॉजिस्टिक्स और बंकर बस्टिंग जैसे अभियानों में उपयोगी हैं और सैनिकों की जान जोखिम में डाले बिना मिशन पूरा कर सकते हैं।
‘साइलेंट वॉरियर्स’ भी बनेंगे आकर्षण
रेमाउंट वेटरनरी कोर (RVC) कंटिंजेंट की अगुवाई कर रहीं कैप्टन हर्षिता राघव ने कहा, “ये जानवर भी भारतीय सेना के सैनिक हैं, ये हमारे साइलेंट वॉरियर्स हैं।”
परेड में जांस्कर पोनी, बैक्ट्रियन ऊंट, शिकारी पक्षी (काइट्स) और सेना के डॉग स्क्वॉड शामिल होंगे। कैप्टन हर्षिता RVC में महिला अधिकारियों की पहली बैच में शामिल हैं।
90 मिनट की भव्य परेड
करीब 90 मिनट तक चलने वाली इस परेड में 18 मार्चिंग कंटिंजेंट और 13 बैंड हिस्सा लेंगे। विरासत, आधुनिकता और स्वदेशी सैन्य शक्ति के संगम के रूप में यह परेड देशवासियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र होगी।
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समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ |
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