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ऑपरेशन मेगाबुरु: एक शव के पोस्टमार्टम में लग रहे डेढ़ घंटे, 8 डॉक्टर और 6 मजिस्ट्रेट कर रहे निगरानी

LHC0088 Yesterday 20:56 views 719
  

माओवादी बुलबुल आल्डा उर्फ डुबलू के शव को लेने के लिए तांतनगर के इलीगड़ा गांव से परिजन पहुंचे सदर अस्पताल। (जागरण)



जागरण संवाददाता, चाईबासा। झारखंड और ओडिशा में आतंक मचाने वाले कुख्यात इनामी माओवादी अनल दा उर्फ पतिराम मांझी सहित कुल 17 हार्डकोर माओवादियों के शव शनिवार देर शाम चाईबासा में पोस्टमार्टम के लिए लाए गए।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, छोटानागरा थाना अंतर्गत सभी शवों को प्लास्टिक में लपेटकर तीन ट्रैक्टर के सहारे शुक्रवार की रात में छोटानागरा थाना में रात भर रखा गया।

शनिवार को दोपहर 12 बजे सारी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद उन्हें सदर अस्पताल चाईबासा के पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। एक पिकअप से सभी शव चार बजे के करीब शव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। पोस्टमार्टम हाउस में 6 टीमों में बंटे 18 डॉक्टर और 6 मजिस्ट्रेट तैनात किए गए।

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पोस्टमार्टम हाउस के आसपास लगभग 200 मीटर के क्षेत्र में बैरिकेड कर सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। किसी को भी अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं थी, यहां तक कि जनरेटर ले जाने वाले वाहनों की भी तलाशी ली गई।

मजिस्ट्रेट के समक्ष वीडियोग्राफी के साथ शवों का पोस्टमार्टम शुरू किया गया। एक पोस्टमार्टम में लगभग 1.5 घंटे का समय लग रहा है। देर रात तक चार-पांच शवों का ही पोस्टमार्टम हो पाया है। शेष शवों का पोस्टमार्टम रविवार को किया जायेगा।
रोजगार की तलाश में गुजरात गया बुलबुल, 6 साल बाद मुठभेड़ में मारा गया

माओवादियों के साथ जुड़कर झारखंड-ओडिशा सीमा क्षेत्र में आतंक फैलाने वाले बुलबुल आल्डा उर्फ डुबलू के शव को लेने के लिए तांतनगर के इलीगड़ा गांव से परिजन सदर अस्पताल चाईबासा पहुंचे। इस संबंध में बुलबुल के बड़े भाई मधुसुदन आल्डा ने बताया कि उनका छोटा भाई बुलबुल गलत संगत में पड़कर माओवादियों के साथ जुड़ गया था।

पूरे परिवार को इसकी जानकारी नहीं थी। बुलबुल वर्ष 2019 में रोजगार की तलाश में गुजरात जाने का कहकर घर से निकला था। मधुसुदन ने बताया कि 2025 में बुलबुल एक दिन के लिए घर आया और उसी दौरान खुलासा किया कि वह माओवादियों के साथ काम कर रहा है।

परिवार ने उसे बहुत समझाया, लेकिन बुलबुल नहीं माना। बुलबुल परिवार में 6 पुत्रों में सबसे छोटा था। उनके तीन बड़े भाई पहले ही बीमारी से मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं। अब दो भाई शेष हैं, जो मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

मधुसुदन ने आगे कहा कि 6 साल पहले बुलबुल की शादी हुई थी, लेकिन कुछ माह बाद पत्नी से विवाद उत्पन्न हो गया और वह मायके चली गई। इसके बाद बुलबुल तनाव में रहा और रोजगार की तलाश में घर छोड़कर गया।

यह भी पढ़ें- झारखंड में नक्सलवाद पर सबसे बड़ा प्रहार, \“ऑपरेशन मेगाबुरु\“ में 17 माओवादियों का अंत
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