एसवाईएल पर फिर बातचीत करेंगे हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। एसवाईएल (सतलुज यमुना लिंक) नहर के विवाद के समाधान का कोई रास्ता निकालने के लिए एक बार फिर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री आमने-सामने होंगे। इस बार दिल्ली की बजाय चंडीगढ़ में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों की बैठक होगी, जिस पर केंद्र सरकार की भी नजर रहेगी।
27 जनवरी को हरियाणा निवास में सुबह साढ़े नौ बजे होने वाली इस बैठक से पहले नायब सिंह सैनी ने 26 जनवरी की शाम छह बजे सीनियर अधिकारियों की बैठक बुलाई है, जिसमें मामले में अब तक की स्टेटस रिपोर्ट पर मंथन किया जाएगा। मामले में सुप्रीम कोर्ट हरियाणा के पक्ष में फैसला सुना चुका है।
इससे पहले पिछले साल नौ जुलाई और पांच अगस्त को भी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में नायब सिंह सैनी और भगवंत मान की बैठक हुई थी, जिसमें कोई हल नहीं निकल पाया। केंद्र सरकार के निर्देश पर एक बार फिर से एसवाईएल के मुद्दे पर हरियाणा व पंजाब संयुक्त बैठक करने जा रहे हैं। हालांकि इस बैठक में केंद्रीय मंत्री के भाग लेने पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला अब अंतिम पड़ाव में है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोनों राज्यों को केंद्र की मध्यस्थता के साथ विवाद का साझा हल करने के लिए बोला गया है। हरियाणा सचिवालय में शनिवार को अवकाश के बावजूद बैठक की तैयारियों को लेकर कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। एसवाईएल नहर का मुद्दा लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच विवाद का कारण बना हुआ है।
हरियाणा का तर्क है कि नहर के निर्माण से उसे उसके वैधानिक जल अधिकार मिलेंगे, जबकि पंजाब लगातार यह कहते हुए विरोध करता रहा है कि उसके पास अतिरिक्त पानी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों और केंद्र सरकार की मध्यस्थता के बावजूद समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
इस बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में हरियाणा सरकार ने एसवाईएल को लेकर अपना रुख और स्पष्ट किया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी कई मंचों से कह चुके हैं कि हरियाणा अपने हक के पानी के लिए कानूनी और संवैधानिक लड़ाई जारी रखेगा। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पंजाब के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। |
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