एसिड अटैक सर्वाइवर BHU प्रोफेसर मंगला कपूर को संगीत साधना के लिए पद्मश्री।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। संगीत साधना में काशी का अप्रतिम योगदान रहा है। इसी कड़ी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर मंगला कपूर को रविवार को पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई। वह एक प्रेरणादायक संगीतकार और एसिड अटैक सर्वाइवर के तौर पर देश में जानी जाती हैं। उनको पूर्व में भी कई सम्मान मिल चुके हैं।
प्रोफेसर मंगला कपूर भारत की पहली एसिड अटैक सर्वाइवर हैं, जिन्होंने अपने जीवन में अनेक चुनौतियों का सामना किया है। 1965 में उन पर एसिड हमला हुआ, जिसके बाद उन्हें छह साल तक अस्पताल में रहना पड़ा। इस कठिन समय के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी शिक्षा को जारी रखा। मंगला ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से अपनी पढ़ाई पूरी की और वहीं प्रोफेसर के पद पर नियुक्त हुईं।
उनका संगीत में योगदान भी उल्लेखनीय है। मंगला कपूर ग्वालियर घराने से जुड़ी हुई हैं और शास्त्रीय संगीत की शिक्षिका हैं। उन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव को साझा करते हुए अनेक छात्रों को संगीत की शिक्षा दी है। उनकी मेहनत और समर्पण के कारण उन्हें “काशी की लता मंगेशकर“ के नाम से भी जाना जाता है।
प्रोफेसर कपूर को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। 1982 में \“तरंग\“ संस्था द्वारा उन्हें “काशी की लता“ का खिताब दिया गया, जबकि राज्यसभा ने उन्हें “रोल मॉडल“ पुरस्कार से नवाजा। यह पुरस्कार उनके जीवन की प्रेरणादायक कहानी और समाज में उनके योगदान को मान्यता देता है।
मंगला कपूर न केवल एक संगीतकार हैं, बल्कि वे समाज सेवा में भी सक्रिय हैं। वे निशुल्क संगीत सिखाती हैं, जिससे वे समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों को संगीत की शिक्षा देकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रही हैं। उनके जीवन पर आधारित एक मराठी फिल्म “मंगला“ 17 जनवरी 2025 को रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म उनकी संघर्षों और उपलब्धियों पर आधारित है।
प्रोफेसर मंगला कपूर का जीवन यह सिखाता है कि कठिनाइयों के बावजूद, अगर हम अपने सपनों के प्रति समर्पित रहें, तो हम किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं। उनका संघर्ष और सफलता की कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह हमें यह भी याद दिलाती है कि संगीत और शिक्षा के माध्यम से हम समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। |