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शिबू सोरेन पर टुंडी को गर्व, केंद्र ने दिया पद्म भूषण सम्मान

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धनबाद के टुंडी स्थिति पोखरिया आश्रम से शिबू सोरेन ने महाजनी प्रथा के विरोध में चलाया था आंदोलन। (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, धनबाद। Shibu Soren: गणतंत्र दिवस-2026 की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी (रविवार) को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने झारखंड आंदोलन के नायक, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित करने की घोषणा की है। यह पुरस्कार जनहित एवं पब्लिक अफेयर में दिए जाने को घोषित किया गया है।

  

पोखरिया आश्रम में शिबू सोरेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते विधायक मथुरा महतो।  

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इससे पहले शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की भी मांग की थी, लेकिन फिलहाल उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित करने का फैसला लिया गया है। इस घोषणा पर टुंडी से JMM विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि यह फैसला स्वागत योग्य है, हालांकि भारत रत्न मिलने पर और अधिक खुशी होती। उन्होंने कहा कि हमारी मांग जारी रहेगी और इस सम्मान के लिए राष्ट्रपति द्रोणपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी।
पद्म पुरस्कार 2026 और राजनीतिक शुरुआत

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2026 के लिए कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री शामिल हैं, जिन 13 पद्म भूषण प्राप्तकर्ताओं में शिबू सोरेन भी शामिल हैं।

शिबू सोरेन की राजनीतिक यात्रा धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड से शुरू हुई थी, जहां से उन्होंने महाजनी प्रथा, शराब और आदिवासी उत्पीड़न के खिलाफ आंदोलन चलाया। टुंडी के पोखरिया आश्रम को आज भी उनके संघर्ष का प्रमुख साक्षी माना जाता है।
आदिवासी नेतृत्व और आंदोलन

शिबू सोरेन एक प्रमुख भारतीय आदिवासी नेता और राजनीतिक व्यक्तित्व थे, जिन्होंने झारखंड के गठन तथा आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाई। वे 11 जनवरी 1944 को झारखंड के राधिक क्षेत्र के नेमरा गाँव में सानताल समुदाय में जन्मे।

उन्होंने 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की, जिसका लक्ष्य जमीन अधिकार, सामाजिक न्याय और अलग झारखंड राज्य की मांग था। इस आंदोलन के निरंतर दबाव में अंततः 2000 में झारखंड राज्य का गठन हुआ।
संघर्ष, चुनाव और विरासत

अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई बार लोकसभा और राज्यसभा का प्रतिनिधित्व किया तथा तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने केंद्र सरकार में कोयला मंत्री के रूप में भी कार्य किया। उनके नेतृत्व में आदिवासी समाज के उत्थान और समानता के लिए लगातार संघर्ष हुआ।

1977 में उन्होंने टुंडी विधानसभा क्षेत्र से अपना पहला चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने दुमका को अपना राजनीतिक केंद्र बनाया और 1980 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की।

उनके राजनीतिक जीवन में कई विवाद और कानूनी मुद्दे भी रहे, परंतु आदिवासी समाज में उनकी लोकप्रियता अटल रही। शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में हुआ और वे आज भी आदिवासी समुदाय में “दिशोम गुरु” के रूप में स्मरणीय हैं।

झामुमो नेता मदन महतो ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा-शिबू सोरेन हमारे लिए भारत रत्न हैं। भारत सरकार से पद्य भूषण का सम्मान मिलना गौरव की है। टुंडी के लिए यह सम्मान बहुत खास है। टुंडी से ही शिबू सोरेन की राजनीतिक यात्रा जो शुरू हुई।
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