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भारतीय अर्थव्यवस्था को कच्चे तेल की कीमतों ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 32

नई दिल्ली, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) की निकासी में कमी और रुपए में निवेश वाली परिसंपत्तियों के आकर्षक मूल्यांकन के चलते भारत की व्यापक आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) स्थिति और विकास की संभावनाएं पहले से अधिक मजबूत हुई हैं। यह बात डीएसपी की एक नई रिपोर्ट में कही गई है।
  इस रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आगे भी आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने वाली नीतियां अपनाने की संभावना रखता है। पर्याप्त तरलता बनाए रखने से बॉन्ड यील्ड में समय के साथ गिरावट आ सकती है।




  रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में फिलहाल अतिरिक्त उत्पादन क्षमता उपलब्ध है और मांग में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है। ऐसे में भारत की आर्थिक विकास दृष्टिकोण (ग्रोथ आउटलुक) में आगे और सुधार की संभावना है।
  डीएसपी का मानना है कि बेहतर आर्थिक वृद्धि, विशेष रूप से नॉमिनल ग्रोथ, कॉरपोरेट भारत की बिक्री में तेजी लाने का काम करेगी, जिससे कंपनियों के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिल सकता है।
  रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट, जिसे पहले बाजार के लिए चिंता का विषय माना जा रहा था, अब अर्थव्यवस्था की एक बड़ी मजबूती बन सकता है।




  रिपोर्ट के अनुसार, रुपए में निवेश वाली परिसंपत्तियों पर बेहतर रिटर्न, रुपए का रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (आरईईआर) अत्यधिक आकर्षक स्तर पर होना, बड़ी कंपनियों के शेयरों का कम मूल्यांकन और एफपीआई के डेट निवेश में बढ़ोतरी जैसे कारकों ने भारत की व्यापक आर्थिक तस्वीर को मजबूत बनाया है।
  रिपोर्ट में बताया गया कि मई 2026 में भारत का आरईईआर 88 से नीचे आ गया, जो आमतौर पर केवल गंभीर आर्थिक दबाव के दौर में देखने को मिलता है। वहीं, भारत और अमेरिका के बीच महंगाई का अंतर भी कम हुआ है, जिससे लंबे समय में रुपए के तेजी से कमजोर होने की आशंका घट गई है।




  शेयर बाजार को लेकर डीएसपी ने लार्ज-कैप शेयरों को सबसे आकर्षक निवेश विकल्प बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कंपनियों की आय (रेवेन्यू) में सुधार आता है, तो बड़ी कंपनियों के शेयर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
  रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने से क्रेडिट ग्रोथ मजबूत होगी और मांग में सुधार देखने को मिलेगा। इसके साथ ही निर्माण गतिविधियों में बढ़ोतरी से सीमेंट उद्योग को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। लंबे समय से दबाव में चल रहे इस सेक्टर के परिचालन प्रदर्शन में सुधार आ सकता है।




  हालांकि निफ्टी आईटी कंपनियों के बारे में रिपोर्ट का कहना है कि उनके शेयर फिलहाल मूल्यांकन के लिहाज से सस्ते हैं, लेकिन उनकी भविष्य की विकास दर को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं।
  रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस समय उभरते बाजारों की तेजी मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी सेक्टर पर आधारित है। दक्षिण कोरिया और ताइवान की टेक कंपनियों का उभरते बाजारों के सूचकांकों में दबदबा बढ़ गया है, जिससे इन सूचकांकों में सेक्टर और कुछ चुनिंदा शेयरों का अत्यधिक केंद्रीकरण हो गया है। ऐसे में भारत उभरते बाजारों की तुलना में एक बेहतर और अपेक्षाकृत विपरीत निवेश अवसर के रूप में उभर रहा है।






DB Desk



bussiness newsIndian economy strengtheneddrop in crude oil prices









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