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टीएमसी के बागी सांसदों का बड़ा दावा, लोकसभा ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 36

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नए राजनीतिक दल नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से जुड़ने वाले सांसदों ने दावा किया है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें सदन में नई सीटें आवंटित करने और अलग कार्यालय उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। यदि ऐसा होता है तो इसे संसद में नए समूह को प्रशासनिक स्तर पर अहम सुविधा मिलने के रूप में देखा जाएगा।




बारासात से सांसद और बागी गुट की प्रमुख नेताओं में शामिल काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी लोकसभा अध्यक्ष से सकारात्मक चर्चा हुई है। उनके अनुसार, स्पीकर ने नए सांसद समूह के लिए बैठने की अलग व्यवस्था और कार्यालय आवंटित करने पर सहमति जताई है।
सर्वदलीय बैठक में प्रतिनिधित्व का दावा

बागी सांसदों का कहना है कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में NCPI के दो प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। उनका मानना है कि यह संसद में उनके नए राजनीतिक समूह को औपचारिक पहचान मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।




हालांकि, लोकसभा सचिवालय की ओर से इस संबंध में आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
स्पीकर से हुई थी अहम मुलाकात

सूत्रों के अनुसार, काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंदोपाध्याय सहित बागी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। बैठक में नए संसद भवन में सांसदों के बैठने की व्यवस्था और कार्यालय आवंटन जैसे प्रशासनिक विषयों पर चर्चा हुई।
बताया जा रहा है कि प्रतिनिधिमंडल ने नए दल से जुड़े लगभग 20 सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी रखी थी।




टीएमसी ने दायर की अयोग्यता याचिका

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत कार्रवाई की मांग की है। लोकसभा में टीएमसी के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को अलग-अलग याचिकाएं सौंपते हुए अनुरोध किया है कि दूसरे दल में शामिल होने वाले सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाए।
याचिकाओं में कहा गया है कि इन सांसदों ने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है, इसलिए उन्हें लोकसभा की सदस्यता बनाए रखने का अधिकार नहीं होना चाहिए। साथ ही टीएमसी ने यह भी आग्रह किया है कि किसी भी अलग गुट को संसद में आधिकारिक सुविधाएं या मान्यता न दी जाए।




मॉनसून सत्र से पहले फैसले पर नजर

संसदीय सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष दल-बदल से जुड़े मामलों पर कानूनी और प्रक्रियात्मक पहलुओं का परीक्षण कर रहे हैं। माना जा रहा है कि मानसून सत्र शुरू होने से पहले या उसके दौरान इन मामलों पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी सांसदों को अलग बैठने की व्यवस्था और अन्य सुविधाएं मिलती हैं, तो इससे पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, यदि दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई होती है तो मामला कानूनी और संवैधानिक बहस का विषय बन सकता है।
फिलहाल सभी पक्ष लोकसभा अध्यक्ष के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बागी सांसदों के दावे कितने सही साबित होते हैं और संसद में उनकी स्थिति क्या होगी।






National Desk



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