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रॉकेट हुई जीडीपी: जादू है कि खत्म ही नहीं होता! मोदी की ताकत के असली राज ये 7 हैं

deltin55 3 day(s) ago views 76

उम्र: 73पद: प्रधानमंत्रीसूची में क्रम: पहला देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आई 100 लिस्ट में शीर्ष पर हैं। 73 वर्षीय पीएम मोदी के सबसे शक्तिशाली भारतीय होने के पीछे कारण यह बताया गया है कि वे लगातार लोकप्रिय बने हुए हैं। आईई ने पीएम की टॉप रैंकिंग का कारण बताते हुए लिखा है कि उनकी सरकार के दो कार्यकालों में जनकल्याण के काम बढ़े हैं, विकास को गति मिली है, महंगाई नियंत्रित है और दुनिया में भारत के लिए एक विशेष स्थान सुरक्षित हुआ है। इसमें कहा गया है कि यह सब एक दुर्जेय पार्टी मशीनरी के कारण संभव हो रहा है जिसने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और राम मंदिर के अभिषेक सहित वैचारिक वादों को पूरा करने में मोदी सरकार की जबर्दस्त मदद की है। आई कहता है कि मोदी सरकार की आलोचना के केंद्र में अक्सर सत्ता का केंद्रीकरण, जांच एजेंसियों का उपयोग, संस्थानों को कमजोर करना, असहमति की गुंजाइश और अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व घटने जैसे मुद्दे होते हैं। पीएम मोदी की विशेष खासियतों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि जी20 शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली ने वैश्विक उच्च पटल पर आम सहमति हासिल की तो पीएम ने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन करते हुए बहुत कड़क संदेश भेजा है कि उनके लिए धर्म के साथ राज्य का जुड़ाव सीमा का उल्लंघन नहीं है बल्कि राजनीति में एक नई लकीर खींचने जैसा है। तीसरी सरकार में आए तो...आगामी आम चुनाव में एनडीए के 400 सीटों के लक्ष्य का बोझ लगभग पूरी तरह से मोदी अपने कंधों पर उठाए हुए हैं। यदि वो लौटते हैं तो भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के अपने वादे के प्रति शासन और राजनीति में कौन से नए अध्याय लिखेंगे? वह परिसीमन, केंद्र-राज्य संबंधों और सामाजिक सद्भाव पर उनके कदम कैसे आगे बढ़ेंगे, यह उनकी विरासत को आकार देगा।

उम्र: 59मंत्रालय: गृह सूची में क्रम: दूसराअमित शाह और नरेंद्र मोदी का साथ दशकों से बना हुआ है। गुजरात में दोनों की जोड़ी बनी और आज दिल्ली तक काफी मजबूती से आगे बढ़ रही है। कहा जाता है कि अमित शाह बीजेपी के चाणक्य हैं। उन्हें चुनावी चाणक्य भी माना जाता है। उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका निभाते हुए पार्टी को सफलता के नए-नए स्वाद चखाए। आज वो बीजेपी अध्यक्ष नहीं हैं, फिर भी पार्टी की रणनीति को आकार देने में आगे रहते हैं। देश के गृह मंत्री के तौर पर अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से संविधान की धारा 370 को निरस्त करने का ऐतिहासिक कदम उठाया। इसके अलावा, उन्होंने अंग्रेजी कानूनों को खत्म करने के अभियान को पंख लगा दिया जब न्याय संहिता ही बदल दी। आईपीसी, सीआरपीसी और भारतीय साक्ष्य कानून को पूरी तरह रिप्लेस कर देने वाले तीन नए कानून 1 जुलाई से लागू हो जाएंगे। तीसरी सरकार में आए तो...नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) पर राजनीतिक बयानबाजी के बावजूद इसके कार्यान्वयन पर रोक लगी हुई है। जनगणना और एनपीआर अधर में लटके हैं। जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय गृह मंत्रालय और सुरक्षा बलों को आतंकवादी हिंसा को रोकना होगा, जो अब जम्मू तक फैल रही है और राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनानी होंगी। मणिपुर सुलग रहा है, प्रगति का रुका हुआ काम बाकी है।



एस जयशंकरउम्र: 69मंत्रालय: विदेश सूची में क्रम: 5वांमोदी सरकार के विदेश मंत्री की छवि उस चतुर और हौसलामंद इंसान की है जिसने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की जबर्दस्त वकालत करता है और किसी भी दबाव को सिरे से खारिज कर देता है। अपने इन गुणों के कारण जयशंकर, मोदी सरकार के सबसे मुखर मंत्री माने जाते हैं। वैश्विक मंच पर उनके बयान अक्सर वायरल हो जाते हैं। वो अमीर और ताकतवर देशों को अपने अकाट्य तर्कों से आईना दिखाते हैं और भारत के हितों की खुलकर पैरवी करते हैं। मोदी सरकार में भारत का मान दुनियाभर में बढ़ने के पीछे विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा योगदान है। उन्होंने भारत की अंतरराष्ट्रीय शक्ति को निखार रहे हैं और लगातार वाहवाही बटोर रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इजरायल-हमास के बीच छिड़ा संघर्ष, जयशंकर के कूटनीतिक कदमों ने दुनिया को चौंकाया है। खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या के प्रयासों को लेकर अमेरिका ने आरोप लगाया तो जयशंकर तुरंत ऐक्टिव हो गए और इसका असर हुआ कि अमेरिका के तेवर नरम पड़ गए। इसी तरह, कनाडा ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया तो उसकी कैसी भद्द पिटी, यह दुनिया ने देखा। तीसरी सरकार में आए तो...क्या एस. जयशंकर इस बार लोकसभा चुनाव लड़ेंगे और मोदी 3.0 के लौटने पर क्या वो फिर से देश के विदेश मंत्री का जिम्मा संभालेंगे?

उम्र: 72मंत्रालय: रक्षा सूची में क्रम: 7वांमोदी सरकार के पहले कार्यकाल में गृह मंत्री का जिम्मा संभालने वाले राजनाथ सिंह अभी देश के रक्षा मंत्री हैं। वो बेहद मिलनसार लेकिन कड़क मिजाज राजनेता हैं। रक्षा मंत्री के रूप में उनकी यह शख्सियत निखरकर सामने आई है। उन्हें गृह मंत्री और रक्षा मंत्री, दोनों का अनुभव है इस कारण आंतरिक और बाह्य सुरक्षा पर उनका नजरिया काफी स्पष्ट और प्रभावी है। उन्होंने सैन्य आधुनिकीकरण की मजबूत नींव रखी और साजो-सामान से लेकर विभिन्न देशों के साथ रक्षा समझौतों तक को आकार देने में गंभीर भूमिका निभाई है। राजनीति, समाज से लेकर विभिन्न वर्गों में अपनी पहुंच और पकड़ के कारण राजनाथ सिंह सरकार के लिए कई मौकों पर काफी उपयोगी साबित हुए हैं। इसका एक उदाहरण किसान आंदोलन भी है जिसका समाधान निकालने के लिए मोदी सरकार उनका उपयोग पिछले दरवाजे से बातचीत के लिए कर रही है। यह राजनाथ सिंह ही थे जिन्होंने राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत हुई तो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सीएम पद का मोह छोड़ने को मनाया था। ​तीसरी सरकार में आए तो...राजनाथ सिंह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ाने को लेकर बेहद संजीदा हैं।



उम्र: 64

मंत्रालय: वित्त और कंपनी मामलों के मंत्री


सूची में क्रम: 8वांदेश की आर्थिक प्रगति की रफ्तार क्या है, इसकी आर्थिक सेहत कैसी है, ये दोनों सवाल किसी भी सरकार की उपलब्धियों के आंकने का बड़ा पैमाना होते हैं। वित्त वर्ष 2023-24 की तीसरी तिमाही के जीडीपी डेटा ने सबको हैरान कर दिया। अक्टूबर-दिसंबर 2023 तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था ने 8.4% की अप्रत्याशित दर से विकास हासिल की है। 2014 में नरेंद्र मोदी की पहली बार सरकार बनी तो बैंकों के एनपीए से लेकर विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी जैसे लुटेरों की खबरें आया करती थीं। उस माहौल में मोदी सरकार के सामने देश को कड़े और बड़े सुधारों के साथ देश को आर्थिक प्रगति की पटरी फिर लाने की गंभीर चुनौती थी। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में अरुण जेटली ने वित्त मंत्री के तौर पर जीएसटी कानून लाकर आर्थिक सुधारों की मजबूत पहल कर दी। फिर निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्रालय संभाला तो चतुराई भरे कदमों से न केवल यूपीए सरकार से विरासत में मिली छिन्न-भिन्न अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया बल्कि इसकी प्रगति को पंख भी लगा दिए। आज बैंक काफी तंदुरुस्त हैं और देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में पांचवें स्थान पर पहुंच चुका है। पीएम मोदी ने गारंटी दी है कि उनकी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था तीसरे पायदान पर पहुंच जाएगी। इस दावे को दुनियाभर से समर्थन हासिल हो रहा है। निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट पेश करके मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड की बराबर कर ली हैं। सीतारमण ने लगातार छठा बजट पेश करके मनमोहन सिंह, यशवंत सिन्हा, पी. चिदंबरम और अरुण जेटली का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। ​​तीसरी सरकार में आईं तो...ऊंची मंहगाई के लगातार जोखिम के बीच सीतारमण को विकास की गति को बनाए रखते हुए एक अच्छा संतुलन बनाने की जरूरत होगी।
उम्र: 59मंत्रालय: वाणिज्य और उद्योग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, कपड़ा मंत्री पद: राज्यसभा में सदन के नेतासूची में क्रम: 12वांपीयूष गोयल राज्यसभा में सदन के नेता हैं। पीएम मोदी की उन पर भरोसे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें तीन मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई है। गोयल अभी वाणिज्य और उद्योग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण और कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वो वक्त-वक्त पर मोदी सरकार के वार्ताकार की भूमिका भी निभाते हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे किसानों से बातीचत में गोयल ने अग्रणी भूमिका निभाई है। वाणिज्य मंत्री के रूप में उन्होंने यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को परवान चढ़ाया जबकि कई अन्य देशों के साथ ऐसे समझौते पाइपलाइन में हैं। खाद्य और सार्वजनिक वितरण मामले के मंत्री के रूप में उनकी भूमिका इसलिए बहुत अहम है कि मोदी सरकार कोविड के वक्त से ही देश के 80 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त अनाज की योजना चला रही है। तीसरी सरकार में आए तो...आम चुनावों की तारीखों की घोषणा से पहले भारत यूके, ओमान और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकता है। गोयल को एफटीए पर बातचीत करते समय सावधानीपूर्वक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित हों। भारत द्वारा यूरोपीय संघ के साथ कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) मुद्दे को 〵ुत मजबूती से✩ठाने की भी उम्मीद है।

उम्र: 53मंत्रालय: रेल, दूरसंचार और आईटी मंत्रीसूची में क्रम: 13वांअश्विनी वैष्णव मोदी सरकार के उन मंत्रियों में शामिल हैं जिन्हें राजनीति से बाहर की दुनिया से लाया गया है। इसी लिस्ट में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और हरदीप सिंह पुरी जैसे नाम भी शामिल हैं। अश्विनी वैष्ण ने रेलवे में सुधारों को आगे बढ़ाया है और टेलिकॉम एवं आईटी मिनिस्टर के रूप में डिजिटल इंडिया की रफ्तार बढ़ाने की दिशा में कई फैसले लिए हैं। वो राज्यसभा के रास्ते संसद पहुंचे थे और इस बार फिर से राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उम्मीद जताई जा सकती है कि मोदी सरकार की सत्ता वापसी हुई तो वो फिर से मंत्री बनेंगे। अश्विनी वैष्णव के नाम उपलब्धियों की फेहरिश्त में 5जी एयरवेव्स की साफ-सुथारी नीलामी, अमेरिका की टॉप टेक्नॉलजी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए मनाने और देश में चिप प्लांट स्थापित करने का उचित माहौल पैदा करने जैसी बातें शामिल हैं।  तीसरी सरकार में आए तो...ओडिशा में कई ट्रेनों की एक बड़ी दुर्घटना के बाद वैष्णव तुरंत ग्राउंड जीरो पर पहुंच गए और डटे रहे। हालांकि, इस घटना ने रेलवे सुरक्षा को लेकर चिंता फिर से जगा दी है, जो आगे चलकर उनके लिए एक महत्वपूर्ण कार्य होगा। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा ट्रेनों के लिए कवच सिस्टम को जल्दी लागू करने जैसे और भी उपाय शामिल हैं। उन्हें वंदे भारत मेट्रो और स्लीपर संस्करणों का सुचारू संचालन भी सुनिश्चित करना है और बिलिमोरा से सूरत तक मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड ट्रेन के पहले सेक्शन के लिए जमीनी काम करना है।



उम्र: 72मंत्रालय: केंद्रीय आवास और शहरी मामलों और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रीसूची में क्रम: 20वांएस. जयशंकर और अश्विनी वैष्णव की तरह ही हरदीप सिंह पुरी भी पीएम मोदी की खोज हैं। उन्होंने इन्हें सरकार में अपनी क्षमता साबित करने का मौका दिया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री के रूप में हरदीप पुरी ने यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से भारत के तेल आयात का काफी आत्मविश्वास के साथ बचाव किया। पुरी के पास आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय भी है जो मोदी सरकार की फ्लैगशिप स्कीम 〳एम आवास योजना✩े लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। पुरी के मंत्रालय ने ही संसद भवन का निर्माण भी करवाया। इसके साथ ही 〶रत मंडपम कन्वेंशन सेंटर✩े निर्माण से भी पुरी की छवि मजबूत हुई है। पीएम मोदी ने इस कन्वेंशन सेंटर की जमकर तारीफ की है। इसी में भारत ने जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी।
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