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SC: अल्पसंख्यक संस्थानों में भी टीईटी होगी अनिवार्य, इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई आज

cy520520 2025-10-28 18:36:57 views 1271
  

अल्पसंख्यक संस्थानों में भी टीईटी अनिवार्यता से जुड़ी याचिका पर सुनवाई आज (फोटो- पीटीआई)



आइएएनएस, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को छह से 14 साल तक के बच्चों के लिए तय स्कूलों में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को अनिवार्य बनाने की मांग से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। इन स्कूलों में अल्पसंख्यक संस्थानों को भी शामिल करने की मांग की गई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
शिक्षा के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा

याचिका में कहा गया है कि अल्पसंख्यक प्रबंधित संस्थानों को शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून के दायरे से बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 21 और 21ए में दिए गए समानता और शिक्षा के मौलिक अधिकारों का हनन है।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित काजलिस्ट के मुताबिक मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और एजी मसीह की पीठ करेगी। याचिका में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (आरटीई अधिनियम) की धारा 1(4) और 1(5) को चुनौती दी गई और उन्हें \“\“मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक\“\“ बताया गया।

जनहित याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 21ए के तहत मिला शिक्षा के अधिकार से मतलब समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से है। इसलिए, कुछ स्कूलों को टीईटी से बाहर रखना संविधान के लक्ष्यों के खिलाफ है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई कर रहे याचिकाकर्ता नितिन उपाध्याय ने कहा कि अनुच्छेद 30, जो अल्पसंख्यकों को शैक्षिक संस्थानों को स्थापित और प्रशासन के आधिकार की रक्षा करता है, उसकी व्याख्या उद्देश्यपरक होनी चाहिए, न कि शाब्दिक।
सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की याचिका पर उठाए सवाल, पूछा- मकसद क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने भारत में वैकल्पिक निवेश फंडों (एआइएफ) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) के अंतिम लाभार्थी मालिकों का सार्वजनिक राजफाश करने की मांग की थी।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने पूछा- \“\“आप सार्वजनिक राजफाश की मांग कर रही हैं। लेकिन उस राजफाश का उद्देश्य क्या है? आप उसका क्या करेंगी? क्या यह सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत है? आप अनुच्छेद 32 की याचिका नहीं रख सकती जो सूचना के अधिकार की प्रकृति में हो।\“\“

महुआ के वकील प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है, लेकिन इसके वास्तविक मालिकों का पता नहीं है।

सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता केवल जानकारी उजागर कराना चाहती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने महुआ को सेबी के समक्ष विस्तृत आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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