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यूपी के गुड़ व्यापार पर छाया संकट, 5 साल में निर्यात 10 गुना कम; क्या है वजह?

Chikheang 2025-12-10 21:39:07 views 893
  

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से गन्ने की ज्यादा रिकवरी और कम दामों के कारण उत्तर प्रदेश में गुड़ का व्यापार खतरे में है। फाइल फोटो



ध्रुव शर्मा, गढ़मुक्तेश्वर। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से गन्ने की रिकवरी ज़्यादा होने और गन्ने के कम दामों की वजह से उत्तर प्रदेश में गुड़ का व्यापार खतरे में पड़ गया है। बंगाल, असम, बिहार और गुजरात के बाज़ारों के बीच दामों के अंतर ने यहां के व्यापारियों के सामने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। व्यापारियों समेत बाज़ारों में काम करने वाले कई लोग बेरोज़गारी का सामना कर रहे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जिले में करीब 218 मिलें और क्रशर चलते हैं। हर मिल में करीब 50 क्विंटल गुड़ बनता है। 10 सितंबर को जब गुड़ बाज़ार में आना शुरू हुआ, तो दाम ₹4,650 से ₹4,750 प्रति क्विंटल के बीच थे। नवंबर के पहले हफ़्ते में जैसे ही महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से गुड़ आया, उत्तर प्रदेश से गुड़ के ज़्यादा दामों की वजह से डिमांड कम होने लगी। कुछ ही दिनों में गुड़ के दाम ₹1,300 प्रति क्विंटल गिरकर ₹3,450 और ₹3,800 प्रति क्विंटल हो गए।

इसके पीछे मुख्य कारण महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के गन्ने में ज़्यादा रिकवरी रेट, कम दाम, और लेबर और ट्रांसपोर्टेशन का कम खर्च है। ट्रेडर्स ने बताया कि हापुड़ का गुड़ बंगाल, असम, बिहार और गुजरात के मार्केट में एक्सपोर्ट किया जाता है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का गुड़ इन मार्केट में करीब डेढ़ महीने पहले आना शुरू हो गया है।

हापुड़ में सवा आठ क्विंटल गन्ने से एक क्विंटल गुड़ बनता है। जबकि, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में सवा आठ क्विंटल गन्ने से सवा क्विंटल गुड़ बनता है। इसके अलावा, इन मार्केट में ट्रांसपोर्टेशन और लेबर का खर्च ज़्यादा है, जबकि वहां गन्ने के दाम ज़्यादा हैं। नतीजतन, उत्तर प्रदेश का गुड़ महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के गुड़ का मुकाबला नहीं कर पाता है। नतीजतन, सप्लाई की कमी से गुड़ के दामों में लगातार गिरावट आई है।  
पांच साल में बड़ा अंतर

करीब पांच साल तक हापुड़ से लगभग 60 गाड़ी (हर गाड़ी में 200 क्विंटल गुड़) दूसरे राज्यों की मंडियों में एक्सपोर्ट होता था। इसके बाद धीरे-धीरे माल की सप्लाई कम होती गई। तीन साल पहले यह आंकड़ा 30 से 35 गाड़ी के बीच था, लेकिन अब यह घटकर आठ से दस गाड़ी रह गया है। गुड़ के दाम कम और खर्च ज्यादा होने से मिल संचालकों को भी संकट का सामना करना पड़ रहा है। वे अपना माल मंडियों में ले जाने के बजाय अब खुरपा फड़, चीनी वगैरह कम मात्रा में बेच रहे हैं। वहीं, मंडियों में माल की कमी से व्यापारी, मजदूर, ट्रांसपोर्टर वगैरह संकट का सामना कर रहे हैं।


गन्ने के ऊंचे दाम और कम रिकवरी के कारण उत्तर प्रदेश का गुड़ महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के गुड़ का मुकाबला नहीं कर पा रहा है। नतीजतन, डेढ़ महीने में ही गुड़ के दाम 1300 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं। - अमित गोयल, जनरल सेक्रेटरी, गुड़ कमेटी

पिछले पांच सालों में मंडियों में कारोबार दस गुना कम हो गया है। इससे गुड़ व्यापारियों और मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। सरकार को इस गंभीर समस्या पर ध्यान देना चाहिए। - वीरेंद्र गर्ग, प्रेसिडेंट, गुड़ कमेटी

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