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यूपी-बिहार के बाद अब झारखंड में बुलडोजर एक्शन, RIMS DIG ग्राउंड से हटाया गया अतिक्रमण, विरोध में उतरे लोग

LHC0088 2025-12-12 15:37:25 views 1238
  

डीआईजी मैदान में मसना के पास से हटाया गया अतिक्रमण। (जागरण)



जागरण संवाददाता, रांची। रिम्स परिसर को अतिक्रमणमुक्त करने को लेकर गुरुवार को प्रशासन ने अभियान तेज किया, लेकिन कार्रवाई के दौरान डीआईजी ग्राउंड इलाके में भारी विरोध देखने को मिला।

सुबह से ही बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौके पर जुटे थे। बरियातू थाना प्रभारी, दंडाधिकारी और पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी के बीच जैसे ही टीम आगे बढ़ी, ग्रामीणों ने अतिक्रमण हटाने का विरोध शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का साफ कहना था कि पहले बड़ी-बड़ी इमारतें तोड़ी जाएं, उसके बाद हम खुद हट जाएंगे। मौके पर तनाव तब बढ़ गया जब प्रशासन ने मसना स्थल की घेराबंदी की गई बाउंड्री का एक हिस्सा ढहा दिया। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और कुछ देर के लिए स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

हालांकि, पुलिस और दंडाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद हालात संभाल लिए गए। मालूम हो कि अब शुक्रवार को डीआइजी क्षेत्र में बड़ा अभियान चलाया जाएगा, जिसमें पक्के मकानों को तोड़ा जाएगा। अब प्रशासन की ओर से कड़ी तैयारी की जा रही है।

विवाद के बीच यह भी साफ दिखा कि प्रशासन ने डीआइजी ग्राउंड में बने किसी भी पक्के निर्माण को नहीं छुआ। कोर्ट के आदेश के बावजूद यहां केवल एक रिक्शा गैरेज जैसे कच्चे निर्माण को हटाकर औपचारिक कार्रवाई कर दी गई। जबकि इसी इलाके में कई पक्के अवैध मकान मौजूद हैं और रिम्स की कुल लगभग नौ एकड़ जमीन पर अतिक्रमण बना हुआ है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन कमजोर पक्ष पर कार्रवाई कर रहा है, जबकि बड़े स्तर के अवैध कब्जे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

उधर, यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ जब अदालत ने दो दिन पहले ही रिम्स प्रशासन और जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया था कि परिसर से सभी अतिक्रमण 72 घंटे के भीतर हटाए जाएं।

इससे पहले भी प्रशासन अचानक अभियान शुरू कर पीछे हट गया था, जिसके बाद कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। मंगलवार की कार्रवाई इसी दबाव में की गई, लेकिन स्थानीय विरोध और रणनीति की कमी के कारण प्रशासनिक कोशिशें अधूरी रह गईं।

रिम्स परिसर में अतिक्रमण वर्षों से बड़ा मुद्दा रहा है, जहां मंदिर, दुकानें, घर, गैराज, अस्थायी शेड और कई पक्के निर्माण खड़े हैं। प्रशासनिक ढिलाई और राजनीतिक-सामाजिक हस्तक्षेप के कारण अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद मंगलवार का अभियान यह बता गया कि रिम्स की जमीन को पूरी तरह मुक्त कराना जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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