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हाईकोर्ट से जमानत के बाद फरार अभियुक्त 37 साल बाद गिरफ्तार, 1988 में हुई थी उम्रकैद की सजा

Chikheang 2025-12-13 07:36:13 views 1139
  



जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। चाचा सहित दो लोगों पर तेजाब फेंकने में उम्रकैद की सजा पा चुका राजेश उर्फ राजू 37 वर्ष तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा। पहचान छिपाकर वह अलग-अलग शहरों में ठिकाने बदलता रहा। बीच-बीच में परिवार से वाट्सएप काल पर बात करता रहा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

पुलिस उसके मिलने की उम्मीद छोड़ चुकी थी, लेकिन गत माह हाईकोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया तो महकमा सक्रिय हुआ। शुक्रवार को उसे मध्य प्रदेश के शिवपुरी में धर दबोचा। जमानत मिलने के बाद वह पहचान बदलकर वहां गायत्री शक्ति पीठ में सेवा कर रहा था।

तिलहर के पक्का कटरा मुहल्ला निवासी सराफा व्यापारी ओमप्रकाश का अपने भतीजे राजेश उर्फ राजू से घर व दुकान के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। 28 अगस्त 1986 को वह अपने मुनीम गंगाधीन के साथ दुकान पर जा रहे थे। उनके पास में आभूषणों की सफाई के लिए तेजाब भी था। इस बीच रास्ते में राजेश ने उन लोगों को रोक लिया। बंटवारे के विवाद में उन लोगों के बीच हाथापाई होने लगी। छीना झपटी के दौरान राजेश ने तेजाब छीनकर ओमप्रकाश पर फेंक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गए।

जमानत मिलने के बाद हुआ था फरार

गंगाधीन के भी छींटें पड़े। ओमप्रकाश के बेटे संजय की तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर राजेश को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद न्यायालय से 30 मई 1988 को तेजाब से हमले में उम्रकैद व जानलेवा हमले में उसे सात वर्ष कारावास की सजा सुनाई। राजेश ने हाईकोर्ट में अपील की तो 1988 में उसे वहां से जमानत मिल गई, लेकिन इसके बाद वह फरार हो गया। साक्ष्य अपने खिलाफ होने के कारण उसे सजा से बचने की उम्मीद नहीं थी। इसलिए वह लगातार ठिकाने बदलता रहा।

गोला व लखीमपुर खीरी में किराये पर घर लेकर रहा। जब काफी समय बीत गया तो लखीमपुर के ही कपूरथला मे मकान बनाकर रहने लगा। उसके बाद यहां पर पत्नी मीरा देवी व बेटे कृष्णा व हिमांशु को छोड़कर स्वयं अलग-अलग राज्यों में धार्मिक स्थलों पर रुकने लगा। वह एक स्थान पर अधिकतम चार माह तक रहता था। पिछले कुछ माह से वह मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित गायत्री शक्ति पीठ में परिव्राजक के रूप में रह रहा था। ओमप्रकाश व गंगादीन का निधन हुआ तो पुलिस भी फाइल को लगभग बंद करके बैठ गई।

इस बीच हाईकोर्ट से उसके विरुद्ध वारंट जारी होते रहे। गत माह 24 नवंबर को गैर जमानती वारंट जारी हुआ तो पुलिस सक्रिय हुई। पता चला कि राजेश पत्नी व बेटों से वाट्सएप काल के जरिए बात करता है। उसके आधार पर लोकेशन ट्रेस करके एसओजी प्रभारी धर्मेंद्र कुमार व सर्विलांस टीम एसआइ मनोज कुमार ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

2010 में राजेश लखीमपुर में जुआ खेलते हुए भी पकड़ा गया था। एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि राजेश ने एक आधार संख्या पर दो आधार कार्ड बनवाए हैं, एक में लखीमपुर व दूसरे में गाजियाबाद के लोनी का पता दर्ज है। उसके विरुद्ध कोई कुर्की आदेश या पुरस्कार घोषित नहीं था। उसको जेल भेजा जा रहा है।
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