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UP: चुनाव में अगड़ा बनने को भाजपा का भी पिछड़े पर ही दांव, सेंधमारी करना बड़ी चुनौती

deltin33 2025-12-14 11:06:23 views 792
  

भूपेंद्र सिंह चाैधरी, पंकज चाैधरी और मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ



अजय जायसवाल, जागरण, लखनऊः वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में हैट-ट्रिक लगाने के लिए सत्ताधारी भाजपा ने एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) समाज पर ही दांव लगाया है।

समाजवादी पार्टी हो या फिर बहुजन समाज पार्टी, चुनाव में अगड़ा बनने के लिए उनकी नजर भी पिछड़े समाज के वोट बैंक पर ही है। इसीलिए दोनों पार्टियों ने भी पिछड़े समाज से आने वाले नेताओं को ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंप रखी है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

राज्य में लगभग 44 प्रतिशत पिछड़ी जातियों में सर्वाधिक यादव बिरादरी के बाद कुर्मी और मौर्य समाज की आबादी मानी जाती है। यही बड़ा कारण है कि भाजपा ने विधानसभा और पंचायत चुनाव में उतरने से पहले पिछड़ों में कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को पार्टी की कमान सौंपी है।

वर्ष 2017 के चुनावी कुरुक्षेत्र में पिछड़े समाज से आने वाले केशव प्रसाद मौर्य के अध्यक्ष रहते हुए भाजपा गठबंधन ने 325 सीटें जीतकर प्रदेश में इतिहास रचा था। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी की कमान पिछड़े वर्ग के स्वतंत्र देव सिंह के हाथ में थी।

उत्तर प्रदेश की राजनीति आज भी जातीय संतुलन पर ही टिकी है। चुनाव में ओबीसी जातियों की निर्णायक भूमिका रहती है। उसी राजनीतिक पार्टी को सत्ता तक पहुंचने में सफलता मिलती है जो अपने बेस वोट बैंक के साथ ही ओबीसी समाज को सर्वाधिक साधने में कामयाब रहती है। तकरीबन 44 प्रतिशत आबादी वाली 79 ओबीसी जातियों में सबसे ज्यादा 10 से 12 प्रतिशत तक हिस्सेदारी यादव समाज की मानी जाती है।

सिर्फ यादवों व मुस्लिम (एमवाई समीकरण) के दम पर सत्ता तक पहुंचने का रास्ता न मिलता देख सपा ने गैर यादव पिछड़े समाज से आने वाली पाल जाति के श्यामलाल पाल को पार्टी का अध्यक्ष बना रखा है। पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव में कांग्रेस संग सपा प्रमुख अखिलेश यादव पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मूले के जरिए भाजपा को बड़ा झटका दे भी चुके हैं।

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अब विधानसभा चुनाव में पीडीए की धार कुंद करने के लिए भाजपा सरकार से लेकर संगठन तक की पैनी नजर ओबीसी वोट बैंक पर है। सपा के पीडीए को परिवार डवलपमेंट अथारिटी बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि उनकी सरकार की नौकरियों में ओबीसी समाज को सर्वाधिक हिस्सेदारी मिली है। डबल इंजन सरकार की लाभार्थीपरक योजनाओं के साथ ही मंत्रिमंडल और संगठन के जरिए भी भाजपा, खासतौर से गैर यादव पिछड़ी बिरादरी को साधने में लगी है।

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यादव के बाद सर्वाधिक प्रभाव रखने वाले आठ से 10 प्रतिशत कुर्मी समाज के पंकज को अध्यक्ष बनाने के बाद भाजपा जल्द ही योगी मंत्रिमंडल के फेरबदल में भी पिछड़ों को और तव्वजो दे सकती है। अभी मंत्रिमंडल में पिछड़े समाज से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित 20 मंत्री हैं।

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दो दशक बाद फिर बहुमत की सरकार बनाने के लिए मायावती भी अपने कोर दलित वोट बैंक के साथ पिछड़ा वर्ग में पैठ बनाने के लिए पाल समाज के विश्वनाथ पाल को प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है।

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वैसे भाजपा जिस तरह से अपर कास्ट के साथ ही गैर यादव ओबीसी बिरादरी को साधने में जुटी है, उसको देखते हुए माना जा रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव में भी सपा-बसपा के सामने इसमें सेंधमारी करने की बड़ी चुनौती होगी।
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