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अंतर्राष्ट्रीय साइबर गैंग का ‘गुर्गा’ मुरादाबाद से हत्थे चढ़ा, 107 सिम बरामद

cy520520 2025-12-15 03:37:28 views 1238
  



जागरण संवाददाता, फतेहपुर। खुद को एटीएस चीफ बताकर सेवानिवृत्त रेलवेकर्मी से 41.10 लाख रुपये की आनलाइन ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह के चौथे गुर्गे को पुलिस ने मुरादाबाद जिले के कटघर थाना क्षेत्र से धर दबोचा। जिसे गिरफ्तार कर साइबर क्राइम पुलिस रविवार देर शाम फतेहपुर लाई। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

हत्थे चढ़े ठग राहुल कुमार ने पूछताछ में बताया कि वह दो मोबाइल कंपनियों में एजेंट का काम करता है। गांव-गांव व मोहल्ले-मोहल्ले फेरीकर सिम बेचता है। गरीब व अशिक्षित ग्राहकों को सिम निर्गत कर उनकी आइडी से दूसरा सिम भी निकाल लेता था और अपने साइबर अपराधी साथियों को दो से ढाई हजार रुपये में बेच देता है। इसके पास से पुलिस ने विभिन्न मोबाइल कंपनियों के 107 सिम व दो एंड्रायड मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

बता दें कि हुसेनगंज थाने के गुल्ला का पुरवा गांव के सेवानिवृत्त रेलवेकर्मी मोतीलाल यादव के विभिन्न बैंक खातों से 4 नवंबर से 17 नवंबर 2025 के मध्य 41.10 लाख रुपये की आनलाइन ठगी हुई थी। पीड़ित ने 24 नवंबर को साइबर क्राइम थाने में सूचना प्रोद्यौगिकी संशोधन अधिनियम के तहत ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था।

साइबर क्राइम पुलिस ने ठगों के मोबाइल नंबर ट्रेस कर बीते एक दिसंबर को दिल्ली के कीर्तिनगर थाने के मानसरोज गार्डेन में रहने वाले सार्थक ग्रोवर, गाजियाबाद जिले के खोडा कालोनी थाने के खोडा कालोनी निवासी राहुल शर्मा व इटावा जिले के बकेवर थाने के बकेवा निवासी संतोष कुमार हाल पता गाजियाबाद जिले के बंदा इनक्लेब खेड़ा कालोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। 5.56 लाख रुपये होल्ड भी करा दिए थे।

इन ठगों के खातों में 17 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया था। ठगों ने पूछताछ में राहुल कुमार का नाम पता चला था। साइबर क्राइम इंस्पेक्टर के नेतृत्व में एसआइ रणधीर सिंह मय फोर्स मुरादाबाद में छापेमारी कर ठग राहुल कुमार निवासी कमला विहार कालोनी पीतल नगरी थाना कटघर जिला मुरादाबाद को धर दबोचा। जिसे रविवार शाम फतेहपुर लेकर आई।
इंस्पेक्टर बोले, विदेशों तक जुड़े हैं तार

साइबर क्राइम इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह ने बताया कि मुरादाबाद से राहुल कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो मोबाइल कंपनी का एजेंट है। गरीबों की आइडी लेकर उन्हें सिम देता था। फिर उन्हीं की आइडी से दूसरा सिम निकालकर साइबर ठगों को बेचता था। इस काम में इसे अच्छी रकम मिलती थी। इसके मोबाइल की सीडीआर व वाट्सएप की जांच की जा रही है। इस अंतरराष्ट्रीय साइबर गैंग के तार दुबई व कंबोडिया तक जुड़े हैं। पंजाब के रहने वाले सरगना यश व हरदीप का अभी पता नहीं लग पा रहा है।
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