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नालंदा में एसटीएफ की कार्रवाई, हथियार तस्करी का पर्दाफाश; AK-47 के कारतूस और चाइना मेड पिस्टल के साथ पांच गिरफ्तार

Chikheang 2025-12-18 15:37:18 views 767
  

हथियार और मोबाइल बरामद



जागरण संवाददाता, नालंदा। बिहार में अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एसटीएफ और स्थानीय पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। लहेरी थाना क्षेत्र के सोहन कुआं मोहल्ले में संयुक्त छापेमारी कर पुलिस ने हथियार तस्करी के एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पांच तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें झारखंड के पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले के तीन सगे भाई भी शामिल हैं। मौके से भारी मात्रा में अवैध हथियार, गोला-बारूद और एक स्कॉर्पियो वाहन बरामद किया गया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

गिरफ्तार आरोपियों के पास से \“मेड इन चाइना\“ लिखी पांच पिस्टल, AK-47 के 153 जिंदा कारतूस, छह मैगजीन और एक स्कॉर्पियो जब्त की गई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नगर थाना क्षेत्र के बारादरी निवासी परवेज, मुंगेर निवासी सौरभ झा तथा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जीआरजई, महबूब और जाहिद हुसैन के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार झारखंड के तीनों आरोपी आपस में सगे भाई हैं और आपराधिक गतिविधियों में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।

लहेरी थानाध्यक्ष रंजीत कुमार रजक ने बताया कि एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि सोहन कुआं मोहल्ले में स्थित त्रिभूवन प्रसाद के मकान के एक फ्लैट में हथियारों की बड़ी खेप की डिलीवरी होने वाली है।

सूचना में यह भी स्पष्ट किया गया था कि झारखंड से कुछ तस्कर हथियार लेने आने वाले हैं। इसके बाद एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से पूरी रणनीति के साथ छापेमारी की और फ्लैट में मौजूद सभी पांचों आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

जांच में यह भी सामने आया है कि जिस फ्लैट से हथियार बरामद हुए, उसे मुंगेर निवासी सौरभ झा ने किराये पर लिया था। वही बिहार थाना क्षेत्र के परवेज और झारखंड के तस्करों के बीच संपर्क का मुख्य सूत्रधार था।

पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला है कि परवेज को वर्ष 2013 में भी लहेरी थाना पुलिस ने 600 कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था। वहीं झारखंड के तीनों सगे भाई हत्या समेत कई संगीन मामलों में पहले जेल जा चुके हैं और हाल ही में जमानत पर बाहर आए थे।

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी केवल हथियार तस्करी ही नहीं, बल्कि जमीन की खरीद-बिक्री के कारोबार से भी जुड़े हुए थे।

आशंका जताई जा रही है कि अवैध हथियारों से होने वाली कमाई को वैध दिखाने के लिए रियल एस्टेट के धंधे का इस्तेमाल किया जा रहा था।

फिलहाल सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियारों की आपूर्ति कहां से की जा रही थी और इन घातक हथियारों को किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए भी छापेमारी तेज कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई नालंदा और आसपास के जिलों में अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
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