LHC0088 • 2025-12-18 23:07:58 • views 721
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े समन अवहेलना मामले में हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है।
रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े समन अवहेलना मामले में हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा भेजे गए समन के अनुपालन से जुड़े इस मामले में दायर याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट 15 जनवरी को सुनवाई करेगा। इससे पहले गुरुवार को इस मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के जस्टिस एके चौधरी की अदालत में हुई। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
दस्तावेज जमा करने के लिए मांगा गया समय
सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन की ओर से अदालत में यह आग्रह किया गया कि कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जमा करने के लिए समय दिया जाए। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि याचिका से संबंधित आवश्यक कागजात प्रस्तुत किए जाने हैं, जो मामले के तथ्यों को स्पष्ट करने में सहायक होंगे। अदालत ने प्रार्थी पक्ष की मांग को स्वीकार करते हुए उन्हें दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय दिया और अगली सुनवाई की तिथि 15 जनवरी निर्धारित की।
एमपी-एमएलए कोर्ट के संज्ञान को दी गई चुनौती
हेमंत सोरेन ने इस मामले में रांची स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। अपनी याचिका में उन्होंने निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को गलत और कानूनन असंगत बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि ईडी द्वारा दायर शिकायतवाद के आधार पर लिया गया संज्ञान विधिसम्मत नहीं है।
ईडी का आरोप : समन की अवहेलना
प्रवर्तन निदेशालय ने हेमंत सोरेन के खिलाफ समन के अनुपालन नहीं करने को लेकर अदालत में शिकायतवाद दर्ज कराया है। ईडी का कहना है कि जमीन घोटाला मामले की जांच के दौरान हेमंत सोरेन को कुल 10 बार समन भेजे गए थे। इनमें से वे केवल दो समन पर ही ईडी के समक्ष उपस्थित हुए, जबकि शेष समनों का उन्होंने पालन नहीं किया।
कानूनी कार्रवाई की मांग
ईडी का तर्क है कि बार-बार भेजे गए समनों की अनदेखी करना समन की अवहेलना की श्रेणी में आता है। एजेंसी ने अदालत से आग्रह किया है कि इसे गंभीरता से लेते हुए हेमंत सोरेन के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जाए। फिलहाल इस शिकायतवाद पर निचली अदालत में सुनवाई जारी है।
इस मामले की अगली सुनवाई को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में खास रुचि देखी जा रही है। 15 जनवरी को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि हाई कोर्ट इस मामले में आगे किस दिशा में कदम बढ़ाता है। |
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