cy520520 • 2025-12-19 05:06:29 • views 1065
झाझरा स्थित जलवायु विहार के पास टौंस नदी में डायवर्जन चैनल बनाने का काम करती सेना की गोल्डन की डिवीजन की इंजीनियर रेजिमेंट। सेना
जागरण संवाददाता, देहरादून: टौंस नदी के ऊपरी क्षेत्रों में अगस्त-सितंबर में हुई भारी वर्षा के बाद नदी के जलस्तर में अचानक तेज बढ़ोतरी होने, तेज बहाव और लगातार हो रहे तट कटाव से दून की जलवायु विहार आवासीय कालोनी झाझरा पर आए खतरे को सेना ने टाल दिया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नागरिक प्रशासन ने भारतीय सेना से सहयोग मांगा। इसके बाद सेना की गोल्डन की डिवीजन की इंजीनियर रेजिमेंट को तुरंत प्रभावित क्षेत्र में तैनात किया गया। चुनौतीपूर्ण मौसम, तेज बहाव व अस्थिर तटों के बीच सेना के इंजीनियरों ने मोर्चा संभाला और बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू कर डायवर्जन चैनल का काम पूरा कर दिया है।
मानसून की भारी वर्षा के दौरान हालात ऐसे बन गए थे कि किसी भी समय नदी का पानी कालोनी की ओर रुख कर सकता था, जिससे जान-माल के बड़े नुकसान की आशंका बढ़ गई थी। सेना की टीम ने विशेष उपकरणों और भारी मशीनों की मदद से नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने की योजना बनाई।
इसके तहत लगभग दो सौ मीटर लंबा एक डायवर्जन चैनल तैयार किया गया, जिससे टौंस नदी के मुख्य प्रवाह को जलवायु विहार कालोनी से दूर मोड़ दिया गया। इस तकनीकी रूप से सटीक और सुनियोजित कार्रवाई से नदी का दबाव आवासीय क्षेत्र के आसपास काफी हद तक कम हो गया।
जलवायु विहार निवासी मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) पीएस राणा ने बताया कि डायवर्जन चैनल बनने के बाद नदी की गति नियंत्रित हुई है और कमजोर तटों पर हो रहा कटाव भी थम गया है। इससे न केवल बाढ़ का खतरा टला है, बल्कि कालोनी में मौजूद घरों और अन्य नागरिक संरचनाओं को भी सुरक्षित किया जा सका है।
मेजर जनरल राणा के अनुसार यह अभियान एक बार फिर भारतीय सेना की पेशेवर दक्षता, तकनीकी क्षमता और आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया का उदाहरण है। राष्ट्रीय सुरक्षा के दायित्वों के साथ-साथ सेना हर आपदा में मानवीय सहायता के लिए आगे रहती है और नागरिक प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
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