जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के शहीद भगत सिंह काॅलेज में एक शिक्षक को जारी किए गए शो-काॅज नोटिस ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। काॅलेज प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई को लेकर शिक्षक ने इसे केवल सेवा संबंधी मामला मानने से इनकार करते हुए जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
काॅलेज की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित शिक्षक 25 नवंबर से बिना स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित हैं और अनिवार्य आधिकारिक बैठकों, विशेष रूप से स्टाफ काउंसिल की बैठकों में शामिल नहीं हुए। प्रशासन का तर्क है कि बार-बार निर्देशों के बावजूद उपस्थिति न देने की स्थिति में यह अवधि विश्वविद्यालय नियमों के तहत ‘डाइस नाॅन’ मानी जाएगी, जिसका अर्थ है ‘नो वर्क, नो पे’।
वहीं, शिक्षक का कहना है कि उन्होंने वे जानबूझकर अनुपस्थिति नहीं रहे और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई समान परिस्थितियों वाले अन्य शिक्षकों की तुलना में असमान है। अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले शिक्षक ने दावा किया कि इस तरह की अनुपस्थिति को लेकर पहले किसी अन्य शिक्षक पर ऐसी सख्त कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने प्रशासन से पिछले वर्षों की बैठकों और उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।
मामले ने काॅलेज में पहले से जारी शिक्षण भार विवाद को भी फिर से उजागर कर दिया है। शिक्षकों के एक वर्ग का आरोप है कि उनसे यूजीसी के तय मानकों से अधिक, 18 से 20 घंटे साप्ताहिक पढ़ाने की अंडरटेकिंग ली गई।
हालांकि, काॅलेज प्राचार्य अरुण कुमार अत्री ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नोटिस पूरी तरह नियमों के तहत जारी किया गया है और किसी तरह का भेदभाव नहीं हुआ यह विवाद अब विश्वविद्यालय स्तर तक पहुंच गया है और शिक्षक संगठनों के बीच भी इसे लेकर मंथन शुरू हो गया है।
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