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Varanasi Cyber Fraud: पहले गिरोह में रहकर सीखा फिर खुद टीम बनाकर करने लगे साइबर ठगी, पूरा सच जानकर पुलिस अधिकारी भी हैरान

cy520520 29 min. ago views 85
  

साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने किया राजफाश। जागरण  



जागरण संवाददाता, वाराणसी। फर्जी काल सेंटर के माध्यम से शेयर ट्रेडिंग के बहाने लोगों के साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना समेत नौ साइबर ठगों को साइबर क्राइम पुलिस ने गिरफ्तार किया। पकड़े गए ठग पहले सिगरा में साइबर ठगों द्वारा संचालित फर्जी काल सेंटर में काम करते थे। पुलिस ने वहां छापा मारकर संचालकों को गिरफ्तार किया तो इन ठगों ने खुद अपना गिरोह बनाकर लोगों को ठगना शुरू कर दिया। पुलिस को उनके पास से पांच लाख रुपये कैश, दो थार के साथ अन्य सामग्री बरामद हुई। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

पकड़े गए साइबर ठगों के बारे में एडीसीपी क्राइम नीतू व एसीपी क्राइम विदुष सक्सेना ने बताया कि तमिलनाडु के व्यक्ति ने शेयर ट्रेडिंग के बहाने 17 लाख की साइबर ठगी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर की थी। इस मामले की जांच के दौरान जानकारी हुई कि लंका थाना क्षेत्र के गांधीनगर कालोनी में साइबर ठगों का गिरोह फर्जी काल सेंटर संचालित कर रहा जिसके माध्यम से लोगों के साथ ठगी की जा रही है।

पुलिस टीम ने छापेमारी करके तीन फ्लैट से नौ साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। गिरोह को जौनपुर के उर्दू बाजार का निवासी शोमिल मोदनवाल और हुसैनाबाद का अभय मौर्या संचालित करते हैं। इनके गिरोह में पकड़ी का अमित सिंह, बढ़ईटोला का कृष्णा विश्वकर्मा, महमदपुर का अभिषेक तिवारी, सैदअलीपुर का शिवा वैश्य, पतुमपुर का अमन मौर्या, सिपाह का विजय कुमार, शहाबुद्दीनपुर का सुजल चौरसिया हैं।  

शोमिल व अभय पूर्व में सिगरा में साइबर ठगों द्वारा संचालित फर्जी काल सेंटर में काम करते थे। यहां उन्होंने शेयर ट्रेडिंग के बहाने ठगी करना सीखा। बीते साल पुलिस ने सिगरा सेंटर पर छापा मारकर संचालकों को गिरफ्तार कर लिया तो इन दोनों ने अपने ही जिले के परिचिति युवकों के साथ खुद का एक गिरोह बना लिया। इसके जरिए लोगों के साथ ठगी करने लगे। इनके निशाने पर खासतौर पर दक्षिण भारत के लोग थे।

खुद संचालित करते थे डीमैट एकाउंट
साइबर ठग लोगों के साथ ठगी करने के लिए सबसे पहले नामी-गिरामी कंपनियों के नाम पर शेयर ट्रेडिंग का विज्ञापन इंटरनेट मीडिया पर करते थे। इसे वास्तविक मानकर अपनी रुचि दिखाने वालों की व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर के उन्हें वाट्सएप ग्रुप में जोड़ते थे जिनमें सौ से डेढ़ सौ लोग होते थे।

उन्हें शेयर ट्रेडिंग के जरिए बड़ा लाभ दिलाने का सब्जबाग दिखाते थे जो उनके झांसे में फंसता था उनके डीमैट एकाउंट का कोड हासिल कर खुद संचालित करते थे। उसमें उपलब्ध रुपये को म्यूल एकाउंट में ट्रांसफर करके ठगी करते थे। जिसके रुपये ट्रांसफर नहीं करते उसे बाजार में निवेश करके ब्रोकरेज कमीशन लेते थे।

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रईसों जैसी जिंदगी जी रहे थे सामान्य घरों के लड़के
साइबर ठगी में पकड़े गए युवक बेहद सामान्य घरों के हैं। इनकी उम्र 25 वर्ष के आसपास है और शिक्षा भी इंटरमीडिएट तक ही पढ़ाई किया। इसके बावजूद साइबर ठगी में माहिर हो गए थे। इन्होंने सैकड़ों लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। उनसे हासिल रुपयों से तीन फ्लैट का किराया प्रत्येक का 25 हजार रुपये देते थे।

सिगरा में एक फ्लैट, दो महिंद्रा थार खरीदा था, सोने में भी निवेश कर रहे थे। सभी की महिला मित्र भी थी जिन पर खूब रुपये उड़ाते थे। नए वर्ष के जश्न के लिए सभी अपनी महिला मित्रों के साथ गोवा जाने की तैयारी कर रहे थे। इससे पहले पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। इनके पास से 20 मोबाइल फोन, 30 एटीएम कार्ड, लैपटाप आदि बरामद हुए हैं।

ठगों की संपत्ति जब्त करेगी पुलिस
पुलिस को जानकारी मिली है कि साइबर ठगों ने कई लोगों को अपना शिकार बनाया है। इनके खिलाफ पांच शिकायतें नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर हैं। इन मामलों में मुकदमा दर्ज करके पुलिस अपराध से हासिल चल-अचल संपत्ति को जब्त करेगी। इनके बैंक खातों को फ्रीज करेगी और इनके खिलाफ गैंग्सटर की कार्रवाई का प्रयास करेगी।
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