वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आव्रजन नीतियों को लागू हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन इनके दूरगामी प्रभाव अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था और समाज के अलग-अलग हिस्सों में साफ दिखने लगे हैं। सीमाओं को बंद करने और वीजा नियमों को सख्त करने की नीति के कारण अमेरिका को जिस श्रमिक-संकट का सामना करना पड़ रहा है, उसने सरकार, उद्योग और स्थानीय समुदायों तीनों को चिंता में डाल दिया है।
निर्माण से स्वास्थ्य सेवा तक श्रमिकों की कमी
लुइसियाना की निर्माण कंपनियां इन दिनों बढ़ई और कुशल मजदूर ढूंढने के लिए जूझ रही हैं। परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रहीं और लागत बढ़ती जा रही है। इसी तरह वेस्ट वर्जीनिया के अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों की भारी कमी महसूस की जा रही है। पहले जिन पदों को विदेशी चिकित्सा पेशेवर भरते थे, वे अब लंबे समय से खाली पड़े हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि विदेशी डॉक्टरों और नर्सों के बिना ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
खेल और समुदाय भी प्रभावित
आव्रजन नीतियों का असर केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। टेनेसी के मेम्फिस में स्थानीय फुटबॉल लीग में टीमें पूरी नहीं बन पा रही हैं, क्योंकि अप्रवासी परिवारों का आना लगभग बंद हो गया है। स्थानीय आयोजकों के अनुसार, पहले जिन बच्चों और युवाओं से खेल मैदान गुलजार रहते थे, वे अब नदारद हैं। इससे सामुदायिक गतिविधियां और सामाजिक ताने-बाने पर भी असर पड़ा है।
दरवाजे बंद करता अमेरिका
आलोचकों का कहना है कि अमेरिका दुनिया के लिए अपने दरवाजे तेजी से बंद कर रहा है। सीमाएं सील की जा रही हैं, कानूनी प्रवेश के रास्तों को संकुचित किया जा रहा है और नए आने वालों के साथ-साथ वर्षों से रह रहे प्रवासियों को भी देश छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। वीजा शुल्क में बढ़ोतरी की गई है, शरणार्थियों के प्रवेश लगभग शून्य पर आ गए हैं और अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बाइडन प्रशासन के कार्यकाल में दी गई अस्थायी कानूनी राहत को रद किए जाने से लाखों लोग किसी भी समय निष्कासन के खतरे में हैं। प्रशासन का दावा है कि वह अब तक छह लाख से अधिक लोगों को देश से बाहर कर चुका है।
आंकड़ों में गिरावट
आक्सफोर्ड इकोनामिक्स के अनुसार, मौजूदा नीतियों के तहत शुद्ध आव्रजन अब लगभग साढ़े चार लाख लोग प्रति वर्ष रह गया है। यह संख्या बाइडन प्रशासन के दौरान दर्ज 20 से 30 लाख के स्तर से कहीं कम है। हालांकि 2024 में अमेरिका की विदेशी मूल की आबादी 14.8 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो 1890 के बाद का उच्चतम स्तर है।
इसके बावजूद व्हाइट हाउस के अधिकारी स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका लक्ष्य 1920 के दशक जैसी आव्रजन नीति के करीब पहुंचना है। उस दौर में कांग्रेस ने दुनिया के आधे हिस्से के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी और शुद्ध आव्रजन लगभग शून्य हो गया था। इसका नतीजा यह हुआ कि 1970 तक विदेशी मूल की आबादी घटकर महज 4.7 प्रतिशत रह गई।
आगे की राह और चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि नई आव्रजन नीतियां अमेरिका में बसने और पैर जमाने की कोशिश कर रहे लाखों लोगों की संभावनाओं को कमजोर कर रही हैं। साथ ही यह देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि और जनसांख्यिकीय संतुलन पर भी सवाल खड़े कर रही हैं।
आयोवा के मार्शलटाउन के नवनिर्वाचित महापौर माइकल लैडेहाफ के शब्दों में, “अगर आप स्थिर रहते हैं और आपके समुदाय में नए लोग नहीं आते, तो आप बूढ़े होने लगते हैं।” यह टिप्पणी उस चिंता को रेखांकित करती है कि बिना नए प्रवासियों के अमेरिका न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि सामाजिक रूप से भी ठहराव की ओर बढ़ सकता है। स्पष्ट है कि आव्रजन को लेकर अमेरिका में बड़े बदलावों का दौर शुरू हो चुका है और इसके परिणाम आने वाले वर्षों में और गहराते नजर आ सकते हैं।

Editorial Team
Donald Trumpstrict visa regulationsUS Newsshortage of workers
Next Story |