सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, रांची। नववर्ष की शुरुआत एचईसी के ठेका कामगारों के लिए निराशाजनक रही। गुरुवार को करीब 1400 ठेका कामगारों को प्लांट में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, जिससे उनकी सेवाएं अचानक समाप्त हो गईं।
इसकी वजह ठेकेदार की निविदा अवधि का खत्म होना बताया गया है। छह माह के लिए की गई निविदा की अवधि पूरी होने के बाद न तो नई निविदा जारी की गई और न ही पुराने ठेकेदार को समय-सीमा बढ़ाई गई। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
इस लापरवाही का सीधा असर ठेका कामगारों पर पड़ा। बिना किसी पूर्व सूचना के काम से रोके जाने पर कामगारों में भारी रोष है। स्थिति यह है कि एचईसी के तीनों प्लांटों में स्थायी कर्मियों की संख्या मात्र 900 के आसपास है।
ऐसे में ठेका कामगारों के बाहर होते ही उत्पादन और अन्य गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं। पहले से ही वर्क ऑर्डर समय पर नहीं मिलने से कामकाज प्रभावित था, अब अचानक काम रुकने से संकट और गहरा गया है।
मामले पर यूनियनों ने भी कड़ा एतराज जताया है। हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन ने निदेशक (उत्पादन) से बातचीत कर ठेका कामगारों की सेवा तत्काल बहाल करने की मांग की। यूनियन का कहना है कि प्रबंधन स्तर पर समय रहते निर्णय नहीं लेने के कारण कामगारों को बार-बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
निदेशक (उत्पादन) ने बातचीत में बताया कि ठेकेदार के माध्यम से ठेका कामगारों को दो माह का सेवा विस्तार देने की योजना थी, लेकिन ठेकेदार ने सेवा विस्तार से इन्कार कर अपनी बकाया राशि की मांग रख दी। हालांकि यूनियन का कहना है कि पूर्व में भी इसी तरह की समस्याओं के कारण ठेका कामगारों की सेवाएं बाधित हो चुकी हैं।
फिलहाल ठेका कामगार भविष्य को लेकर चिंतित हैं। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि एचईसी प्रबंधन कब तक समाधान निकालता है और कामगार दोबारा प्लांट में काम पर लौट पाते हैं। |