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नाइट सफारी में नहीं बनेगा एडवेंचर जोन, सीईसी ने चार लेन सड़क बनाने पर भी लगाई रोक

Chikheang 4 hour(s) ago views 503
  



चार लेन सड़क बनाने पर भी रोक, अब दो लेन ही बनेंगी

नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान नहीं होगा स्थानांतरित

शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ। वन्यजीव संरक्षण और विकास के बीच संतुलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने लखनऊ में प्रस्तावित नाइट सफारी परियोजना को सैद्धांतिक अनुमति तो दे दी है, लेकिन इसके साथ कड़ी पर्यावरणीय और प्रशासनिक शर्तें भी जोड़ी हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

सीईसी ने नाइट सफारी में प्रस्तावित एडवेंचर जोन रद कर दिया है। कहा है कि वन भूमि का उपयोग गैर-वानिकी मनोरंजन गतिविधियों के लिए नहीं हो सकता है। चार लेन सड़क पर भी रोक लगा दी है, अब यहां दो लेन सड़कें ही बन सकेंगी। सीइसी ने नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को भी अनुचित ठहराया है। समिति का मानना है कि मौजूदा 72 एकड़ में ही चिड़ियाघर का आधुनिकीकरण संभव है और इसे शहर के प्रमुख ‘ग्रीन लंग’ के रूप में बनाए रखना जरूरी है।

कुकरैल वन चूंकि आरक्षित वन क्षेत्र में आता है, यहां पर नाइट सफारी के निर्माण से पहले सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति अनिवार्य है। इसलिए पिछले दिनों प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में अनुमति के लिए गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण को कितना नुकसान होगा इसकी जांच सीईसी से कराने के निर्देश दिए थे।

यह समिति पर्यावरण के मामले में सुप्रीम कोर्ट को सलाह देती है। सीईसी ने अपनी 310 पेज की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। इसमें कहा गया है कि नाइट सफारी परियोजना को पहले ही केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) की स्वीकृति मिल चुकी है, इसलिए इसे आगे बढ़ने की अनुमति दी जा सकती है।

हालांकि यह अनुमति पूरी तरह सशर्त होगी और सीजेडए तथा राज्य वन विभाग द्वारा तय सभी नियमों का बिना किसी ढील के पालन करना अनिवार्य होगा। समिति ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नाइट सफारी का डिजाइन, निर्माण और संचालन सीजेडए के सफारी पार्क संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही होगा।

पर्यावरणीय निगरानी के लिए एक विशेष निगरानी समिति गठित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिसमें वन्यजीव विशेषज्ञ, सीजेडए प्रतिनिधि और राज्य वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति हर महीने निरीक्षण करेगी और हर तीन महीने में राज्य सरकार, सीजेडए और सीईसी को रिपोर्ट सौंपेगी।

सीईसी ने पेड़ कटान पर भी सख्त रुख अपनाया है। नाइट सफारी में तेज रोशनी और शोर-शराबे पर भी रोक रहेगी। \“लो-इंटेंसिटी\“, \“एनिमल-फ्रेंडली लाइटिंग\“, नियंत्रित वाहन आवाजाही और सीमित समय में प्रवेश जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य होंगी। साथ ही प्राकृतिक नालों, जलधाराओं और आर्द्रभूमि से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी।

इसी तरह मौजूदा वन सड़क को चार लेन में बदलने के प्रस्ताव पर भी रोक लगा दी गई है। समिति के अनुसार, ऐसा करना जंगल के लिए घातक होगा। सड़क को सिर्फ दो लेन तक सीमित रखते हुए संरक्षण-अनुकूल स्वरूप में ही विकसित किया जा सकता है।

सीईसी ने नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को भी अनुचित ठहराया है। समिति ने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो दूसरा चिड़ियाघर यहां बना सकती है, लेकिन मौजूदा को स्थानांतरित करना उचित नहीं है।


सीईसी ने नाइट सफारी में एडवेंचर जोन बनाने पर रोक लगाई है और वर्तमान चिड़ियाघर को स्थानांतरित न करने के लिए कहा है। यह दोनों ही शर्तें सरकार मानने के लिए तैयार है। सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलते ही नाइट सफारी का काम शुरू कर देंगे।

-डाॅ. अरुण कुमार सक्सेना, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री


1510 करोड़ रुपये की है परियोजना

प्रदेश सरकार देश की पहली व विश्व की पांचवीं नाइट सफारी लखनऊ में बनवाने जा रही है। अभी सिंगापुर, थाइलैंड, चीन व इंडोनेशिया में नाइट सफारी हैं। करीब 855 एकड़ क्षेत्रफल में 1510 करोड़ रुपये की लागत से कुकरैल नाइट सफारी व चिड़ियाघर विकसित किया जाना है। यहां 610.34 एकड़ यानी करीब 71.3 प्रतिशत क्षेत्रफल में हरियाली रहेगी।

क्या है एडवेंचर जोन

एडवेंचर जोन में रोमांचक गतिविधियां जिप लाइन/सुपरमैन जिपलाइन, स्काई साइकिल व स्काई रोलर, बाडी व लैंड जार्बिंग, टायर व नेट क्लाइम्बिंग, बर्मा ब्रिज, पर्वतारोहण आदि की सुविधा का विकास किया जाना था। जल क्रीड़ा में पैडल बोट, वाटर ट्रैम्पोलिन के अलावा खेल व मनोरंजन के लिए यहां तीरंदाजी आदि की सुविधा विकसित की जानी थी। यहां कैंपिंग साइट में कुल छह जोन में 120 कैंपिंग हट बनाई जानी थीं।
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