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शिव की नगरी काशी में आंग्ल नववर्ष का गंगा स्नान, बाबा के ध्यान से हुआ स्वागत

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पाश्चात्य पर्व पर फैला प्राची के सूर्य का प्रकाश, पार्टियों-पार्कों से इतर मंदिरों में भीड़। जागरण  



जागरण संवाददाता, वाराणसी। यह पाश्चात्य के पर्वाकाश में प्राची के संस्कारों के सूरज की जगमगाहट थी। नितांत पश्चिमी सभ्यता के पर्व ख्रिस्त नववर्ष को भारतीय सनातन संस्कृति ने अपने रंग में लिया, नववर्ष के उल्लास के प्रवाह ने सनातन धर्मावलंबियों को मदिरालय की जगह देवालय पहुंचा दिया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

भगवान शिव की नगरी काशी में ईसाई नववर्ष का आरंभ काशीवासी हों या अन्य जनपदों-राज्यों से आए श्रद्धालु अथवा देशी-विदेशी पर्यटक सबने गंगा स्नान और बाबा के ध्यान से किया। भोर की मंगला आरती से लेकर शयन आरती तक केवल बाबा धाम मेें ही नहीं अपितु कालभैरव मंदिर, संकटमोचन मंदिर, दुर्गाकुंड, गुरु वृहस्पति मंदिर समेत काशी के सभी छोटे-बड़े मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।

सबने अपने ईष्ट के दर्शन-पूजन कर दैनिक जीवन व्यवहार में प्रयुक्त इस कैलेंडर नववर्ष में सुखी-समृद्ध, सफलता, आरोग्य, प्रसन्नता व कल्याण की कामना की। काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ के धाम में नए वर्ष के प्रथम दिन की शाम छह बजे तक 3.51 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। शयन आरती तक यह संख्या लगभग पांच लाख पहुंच जाने की संभावना बनी हुई थी।  

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में नववर्ष की प्रथम मंगला आरती में भी काफी संख्या में श्रद्धालु जुटे थे। नववर्ष के प्रथम दिवस का शुभारंभ बाबा के दर्शन से करने की चाह लिए आधी रात के बाद से ही श्रद्धालु बनी बैरिकेडिंग में कतारों मेंं लग गए थे। भोर में तीन बजे मंगला आरती के पश्चात ज्योंहि मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खुले, ‘ओम नम: पार्वतीपतये हर-हर महादेव’ के उद्घोष से भोर की नीरवता ऊर्जस्वित हो उठी। सुबह आठ बजे तक 70 हजार, दोपहर 12 बजे तक एक लाख तो शाम के छह बजे तक 3.51 लाख लोग बाबा का दर्शन कर चुके थे।

इसके अतिरिक्त गुरु वृहस्पति देव मंदिर, संकटमोचन मंदिर, बाबा कालभैरव मंदिर, दुर्गाकुंड स्थित मां दुर्गा मंदिर, धर्मसंघ, बड़ा गणेश, चिंतामणि गणेश मंदिर, अर्दली बाजार महावीर मंदिर आदि स्थानों पर देर रात तक भक्तों की कतार लगी रही। गंगा घाटों पर लोगों ने मां सुरसरि की पवित्र धारा में डुबकी लगाकर मन को आध्यात्मिक शीतलता प्रदान की।

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गंगा पार रेती में रहा मेले के उत्सव सा दृश्य
नववर्ष के प्रथम दिवस बहुत से लोगों ने गंगा में नौकायन कर घाटों के मनोरम दृश्यों का अवलोकन किया तो उस पार रेती में मेले सा दृश्य रहा। सपरिवार पहुंचे लोगों ने गंगा की रेती में पिकनिक, खेलकूद, घुड़सवारी, ऊंट की सवारी कर मौज-मस्ती की। बच्चों, युवतियां सेल्फी लेने व रील बनाने में व्यस्त रहे।

नमो घाट भी उत्साहियों का प्रमुख डेस्टिनेशन
दशाश्वमेध घाट व असि घाट पर नववर्ष की पहली आरती देखने के लिए श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। उधर नमो घाट नववर्ष के उत्साहीजनों का प्रमुख डेस्टिनेशन रहा। वहां भी काफी संख्या में लोग नए वर्ष का आनंद उठाने के लिए पिकनिक मनाने पहुंचे थे। होटर, रेस्तरां व ढाबों में भी लोगों ने दावतों का आनंद उठाया।
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