LHC0088 • 1 hour(s) ago • views 885
राज्य ब्यूरो, रांची। सुप्रीम कोर्ट ने देवघर में 51 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर माली के रूप में काम करने वाले मोती राम की सेवा नियमित करने का आदेश को बरकरार रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए मार्केटिंग बोर्ड की एसएलपी खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के प्रार्थी को नियमित करने का आदेश को बरकरार रखा। प्रार्थी 24 साल से नियमित सेवा दे रहा है।
देवघर के बंपास टाउन निवासी मोती राम की नियुक्ति जून 2001 में देवघर मार्केटिंग बोर्ड में दैनिक वेतनभोगी माली के रूप में हुई थी। प्रशासनिक भवन के पास लगाए गए आम के 10 पौधों की देखभाल के लिए उन्हें रखा गया था। उस समय उनकी मजदूरी 51 रुपये प्रतिदिन तय की गई थी।
वर्ष 2015 में मोती राम ने मजदूरी बढ़ाने के लिए आवेदन दिया। इसमें उन्होंने बताया कि उन्हें मात्र 4346 रुपये मासिक मिलते हैं। इसके बाद तत्कालीन उपायुक्त ने मार्च 2015 में उनकी मजदूरी बढ़ाकर 7593 रुपये प्रतिमाह करने का आदेश दिया।
साल 2020 में जिला प्रशासन ने 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की सेवा नियमित करने को लेकर सूचना जारी की। इसके तहत मोती राम ने भी आवेदन दिया, लेकिन कोई निर्णय नहीं होने पर उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान मार्केटिंग बोर्ड और प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि मोती राम दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी थे और सेवा नियमित करने की कोई शर्त नहीं थी। फरवरी 2023 में अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
इसके बाद उन्होंने खंडपीठ में अपील दाखिल की। अपील पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा कि मोती राम 24 वर्षों से लगातार काम कर रहे थे और नियमितीकरण के लिए आवेदन भी मांगे गए थे। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उनकी सेवा नियमित करने का आदेश दिया।
इस आदेश को चुनौती देते हुए मार्केटिंग बोर्ड सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए बोर्ड की याचिका खारिज कर दी और मोती राम की सेवा नियमित करने के आदेश को बरकरार रखा। |
|