चीन की ड्रंक ड्राइवर सर्विस नशे में ड्राइविंग का स्मार्ट समाधान।
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। नशे में गाड़ी चलाना दुनियाभर में एक गंभीर समस्या है। अक्सर लोग पार्टी या जश्न के बाद यह सोचकर रिस्क ले लेते हैं कि मैं ठीक हूं, चला लूंगा। चीन ने इस समस्या का एक बेहद स्मार्ट और व्यावहारिक समाधान निकाल लिया है, जिसे लोग आमतौर पर ड्रंक ड्राइवर सर्विस कहते हैं। यह कोई कहानी नहीं, बल्कि एक रियल लाइफ अनुभव है, जिसे एक महिला ने सोशल मीडिया पर शेयर किया। उनका अनुभव बताता है कि कैसे टेक्नोलॉजी, सुविधा और जिम्मेदारी एक साथ मिलकर जिंदगियां बचा सकती हैं।
कैसे काम करती है ड्रंक ड्राइवर सर्विस?
महिला के मुताबिक, वह और उसकी दोस्त एक पार्टी में गए थे। दोनों ने पहले शराब न पीने का प्लान बनाया था, लेकिन पार्टी में ऐसा अक्सर होता है प्लान बदल जाते हैं। ऐसे में गाड़ी खुद चलाने का रिस्क लेने के बजाय उन्होंने ड्रंक ड्राइवर सर्विस बुक कर ली। कुछ ही मिनटों में एक ट्रेनड ड्राइवर पहुंचा।
Drank too much? No problem. In China, your car still goes home with you pic.twitter.com/b2XtLZqy1g — nindi (@nindilele) December 9, 2025
सबसे दिलचस्प बात?
ड्राइवर एक छोटी फोल्डिंग ई-बाइक पर आया। उसने बाइक को मोड़कर कार की डिक्की में रखा, फिर उसी कार को सुरक्षित तरीके से घर तक ड्राइव किया। कार पार्क करने के बाद वह अपनी बाइक निकाली और वहां से चला गया।
कितनी है इस सर्विस की कीमत?
इस सर्विस की सबसे बड़ी खासियत इसकी अफॉर्डेबिलिटी है। कई मामलों में यह इंश्योरेंस में शामिल होती है। अगर इंश्योरेंस में न हो, तो भी इसका खर्च टैक्सी से थोड़ा ही ज्यादा होता है। कई ड्राइवर क्लब और नाइटलाइफ एरिया के पास पहले से मौजूद रहते हैं। इसकी वजह से लोगों को ड्राइवर के आने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता है।
इस सर्विस के पीछे कौन है?
चीन की जानी-मानी राइड-हेलिंग कंपनी Didi जिसे अक्सर चीन का Uber कहा जाता है। इस कंपनी ने ड्रंक ड्राइवर सर्विस को 2022 में शुरू की थी। इसमें यूजर ऐप के जरिए अस्थायी पर्सनल ड्राइवर बुक कर सकता है, जो उसकी आपकी कार को ड्राइव करता है। खासतौर पर तब, जब कार मालिक खुद ड्राइव करने की स्थिति में न हो।
क्यों जरूरी है ऐसी सर्विस?
यह सर्विस सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जिम्मेदार ड्राइविंग कल्चर को बढ़ावा देती है। नशे में ड्राइविंग से होने वाले हादसे कम हो सकते हैं। लोगों को रिस्क लेने की बजाय एक सुरक्षित विकल्प मिलता है। यही वजह है कि कई लोग मानते हैं कि अगर यह मॉडल दूसरे देशों में अपनाया जाए, तो कई जानें बच सकती हैं। |
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