पांच माह से रोजगार सेवकों को नहीं मिला मानदेय।
संवाद सूत्र, मवई (अयोध्या)। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव तक पहुंचाने वाले ग्राम रोजगार सेवक सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। मवई ब्लाक में कार्यरत लगभग 36 रोजगार सेवकों को पांच माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है़ जबकि मानदेय के तौर पर ग्राम रोजगार सेवकों को सात हजार 788 रुपये प्रति माह मिलता है। वह भी समय से न मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई रोजगार सेवक कर्ज लेने को मजबूर हैं और उनके परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए है। ग्राम रोजगार सेवक संघ के ब्लाक अध्यक्ष जुनेद अहमद ने बताया कि जब सरकार के महत्वपूर्ण अभियान की जिम्मेदारी रोजगार सेवकों पर है तो उन्हें उनका मानदेय क्यों नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्राम रोजगार सेवकों से एसआईआर, मनरेगा सहित ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित सरकार की तमाम जन कल्याणकारी योजनाओं में कार्य लिया गया लेकिन पिछले पांच माह से मानदेय नहीं मिला।
मानदेय न मिलने से उनके बच्चों की पढ़ाई, इलाज, राशन, बिजली, किराया जैसी बुनियादी जरूरतें भी नहीं पूरी हो पा रही हैं। मानदेय न मिलने से गांवों में योजनाओं का क्रियान्वयन भी प्रभावित होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
ग्राम रोजगार सेवक साहब प्रसाद, धर्मेंद्र गुप्त, आशुतोष सिंह, वीरेंद्र वर्मा, बृजमोहन, संतोष कुमार, राजेश यादव, कमल कुमार ने पांच माह के बकाया मानदेय का भुगतान अविलंब कराए जाने की मांग की है। इस संबंध में डीसी मनरेगा उपेंद्र पाठक से बात करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो सका। |