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गोरखपुर BRD मेडिकल कॉलेज में बुलाने पर भी नहीं आ रहे पिता, हॉस्टल बना बेटे का स्थायी ठिकाना

LHC0088 2026-1-4 16:26:42 views 151
  

एमबीबीएस 2014 बैच का छात्र न तो नियमित पढ़ाई कर रहा न ही परीक्षा दे रहा। जागरण  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज प्रशासन के लिए सिरदर्द बने एमबीबीएस 2014 बैच का छात्र ही नहीं उसके पिता भी सिरदर्द बन गए हैं। कालेज प्रशासन तीन बार उन्हें फोन करके बुला चुका है, लेकिन बेटे के भविष्य को लेकर पिता बेफिक्र हैं। वह न तो खुद कालेज आ रहे हैं और न ही बेटे को लेकर कालेज प्रशासन से किसी तरह का संपर्क कर रहे हैं।

बीते 11 वर्षों से न्यू यूजी हास्टल में रहने वाला छात्र आज तक एमबीबीएस पहले वर्ष की परीक्षा पास नहीं कर सका है। वह न तो नियमित पढ़ाई करता है और न ही किसी वर्ष परीक्षा में सम्मिलित हुआ है, फिर भी नियमों की पेचीदगियों के चलते कालेज प्रशासन उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।

वर्ष 2015 में प्रथम वर्ष की परीक्षा में वह अनुत्तीर्ण हो गया। इसके बाद उसने कभी भी परीक्षा फार्म नहीं भरा। मेडिकल शिक्षा के नियमों के तहत यदि कोई छात्र एमबीबीएस में प्रवेश लेने के बाद पहले वर्ष में असफल हो जाता है, तो उसे दोबारा एडमिशन लेने की आवश्यकता नहीं होती। केवल परीक्षा फार्म भरकर पुनः परीक्षा में शामिल होना होता है।

इसी नियम का सहारा लेकर छात्र का नामांकन आज भी तकनीकी रूप से कायम है, जिससे कालेज प्रशासन उसके प्रवेश को निरस्त नहीं कर पा रहा है। कालेज प्रशासन जब छात्र को समझाते समझाते थक तो पिता से संपर्क शुरू किया। कालेज प्रशासन ने इस मामले को सुलझाने के लिए छात्र के पिता से संपर्क करने का प्रयास किया।

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प्राचार्य कार्यालय की ओर से उन्हें तीन बार फोन कर कालेज बुलाया गया, लेकिन बार-बार बुलाने के बावजूद वे आज तक कालेज नहीं पहुंचे हैं। कालेज प्रशासन के लिए समस्या इसलिए भी जटिल हो गई है क्योंकि छात्र का नामांकन सक्रिय होने के कारण उसे हास्टल से बाहर निकालना नियमों के तहत संभव नहीं हो पा रहा है।

परीक्षा फार्म भरते समय ही मेस का भी शुल्क जमा होता है। चूंकि छात्र वर्षों से परीक्षा फार्म नहीं भर रहा है, इसलिए वह मेस शुल्क भी जमा नहीं करता। इसके बावजूद वह हास्टल में रहकर मुफ्त भोजन और आवास की सुविधा का लाभ उठा रहा है।


इस संबंध में कालेज प्रशासन ने नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) से मार्गदर्शन मांगा है। एनएमसी से स्पष्ट दिशा निर्देश मिलने के बाद ही छात्र के मामले में कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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-डा. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज।
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