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भीख से व्यवसाय तक: अगरबत्ती–जूता बनाएंगे भिक्षुक, जानिए कैसे उन्हें उद्यमी बना रही है बिहार सरकार की योजना

Chikheang 4 day(s) ago views 954
  

अगरबत्ती–जूता बनाएंगे भिक्षुक



जागरण संवाददाता, पटना। बिहार सरकार ने भिक्षावृत्ति के उन्मूलन और भिक्षुकों को सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत अब भिक्षुक केवल आश्रय और भोजन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इस योजना के जरिए भिक्षुक अगरबत्ती, जूते-चप्पल, दीया-बाती, नारियल झाड़ू और जूट उत्पाद जैसे सामान तैयार कर बाजार में बेच रहे हैं।

राज्य में फिलहाल 10 जिलों में कुल 19 भिक्षुक पुनर्वास गृह संचालित हैं। इनमें पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, मुंगेर और सारण शामिल हैं।

इन पुनर्वास गृहों में वृद्ध, दिव्यांग और शारीरिक रूप से अक्षम भिक्षुकों को निःशुल्क भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा सुविधा, परामर्श, मनोरंजन और योग जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही, बिछुड़े हुए भिक्षुकों को उनके परिवार से जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है।

सरकार इस योजना के विस्तार पर भी तेजी से काम कर रही है। पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, वैशाली, अररिया, किशनगंज, जमुई, शेखपुरा, लखीसराय, मधेपुरा, औरंगाबाद, कटिहार, अरवल और रोहतास में 14 नए भिक्षुक पुनर्वास गृह की स्थापना और संचालन की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा भोजपुर जिले में दो हाफ वे होम भी खोले जाने हैं।
स्वावलंबन के लिए आर्थिक सहायता

भिक्षुकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरकार उन्हें स्वरोजगार के लिए 10 हजार रुपये तक की एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।

समाज कल्याण विभाग के अनुसार अब तक 544 भिक्षुकों को यह सहायता दी जा चुकी है। इसके साथ ही आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाता खुलवाने में मदद की जाती है।

वृद्ध, विधवा और दिव्यांग भिक्षुकों को पेंशन योजना से भी जोड़ा जा रहा है, जबकि बच्चों की शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था अलग से की जा रही है।
भिक्षुक उत्पादक समूह से बदली जिंदगी

वर्तमान में राज्य में छह सक्षम उत्पादक समूह सक्रिय हैं, जहां भिक्षुकों को विभिन्न स्किल डेवलपमेंट कोर्स कराए जा रहे हैं। इन समूहों में तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय सीधे निर्माताओं में बांटी जाती है।

इससे भिक्षुकों में आत्मसम्मान बढ़ा है और वे भीख पर निर्भर रहने के बजाय मेहनत से कमाई कर रहे हैं।
कैसे लें योजना का लाभ

मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना का लाभ बिहार के मूल निवासियों को मिलता है, जिनका जीवन भिक्षावृत्ति पर निर्भर रहा हो। इसमें कोई आयु सीमा नहीं है, हालांकि बाल भिक्षुकों और वृद्धों के लिए विशेष प्रावधान हैं।

आवेदन के लिए आर्थिक स्थिति का प्रमाण पत्र आवश्यक है, जबकि दिव्यांग या गंभीर रोग से पीड़ित आवेदकों को चिकित्सकीय प्रमाण पत्र देना होता है।

इच्छुक व्यक्ति अपने जिले के जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग या जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (सक्षम कार्यालय) में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। भौतिक सत्यापन के बाद योग्य भिक्षुकों को योजना का लाभ दिया जाता है।

यह योजना न सिर्फ भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने की दिशा में कारगर साबित हो रही है, बल्कि सैकड़ों लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से भी जोड़ रही है।
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