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सहारनपुर में 250 से अधिक गांवों के पांच लाख लोग पी रहे दूषित जल, बीमारियों से हो चुकी 4000 से अधिक मौत

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जागरण संवाददाता, सहारनपुर। जिले के 250 से अधिक गांवों में पांच लाख से ज्यादा लोग दूषित जल पीने को विवश हैं। बड़ी संख्या में लोग दूूषित जल के पीने से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। केंद्र व प्रदेश सरकारें जहां लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है।

लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने को हर घर नल जैसी योजना चलाई हुई हैं। हालांकि योजनाओं के क्रियान्वयन में हीलाहवाली के चलते लोगों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रशासनिक सुस्ती को तोड़ने और पेयजल से वंचित लोगों की समस्या उठाने के लिए दैनिक जागरण ने छह दिवसीय अभियान शुरू किया है।  

सहारनपुर जिले में पांच तहसील व 11 ब्लाक है जिसमें करीब 28 लाख लोग निवास करते है, इन ब्लाक के अनेक गांव के बाशिंदे वर्षों दूषित जल से प्रभावित है। इनमें अधिकांश गांव महानगर के मध्य से होकर बहने वाली पांवधोई व ढमोला नदी के अलावा हिंडन व कृष्णा नदीं के किनारे बसे है।

ये नदियां पूरी तरह से प्रदूषित है जिसके कारण अनेक गांवों का पानी दूषित होने के साथ ही पीने योग्य नहीं रह गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार इन गांवों में जल जनित रोगों से 4000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। दूषित भूजल से डायरिया, हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस, त्वचा रोग, पीलिया तथा कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां हो रही है।

इन ब्लाक में ये गांव सबसे अधिक प्रभावित

  • रामपुर मनिहारन ब्लाक के गांव भगवानपुर, शब्बीरपुर, शिमलाना, बरगांव, चिरौन, कुटुबमजरा, ननहेरा कलां, कटला, पीपली, लुकड़दी, जबीरन, सिसौनी, चंद्रपुर, ननहेरा खुर्द।
  • नानौता ब्लाक के गांव बनेड़ा खेमचंद, सावंतखेड़ी, रतनहेड़ी, बैहेरा, मियां, खुदाबक्शपुर, माजरा।
  • देवबंद ब्लाक में देवबंद शहर और आसपास के करीब 12 गांव काली नदी के प्रदूषित जल से पीड़ित है।
  • उत्तराखंड सीमा पर स्थित सदौली हरिया, कृष्णी गांव, धनकपुर भी प्रभावित है।


ये गांव हिंडन, कृष्णा और काली नदियों के किनारे हैं, जहां औद्योगिक और घरेलू कचरा भूजल को दूषित करता है। 2024-2025 की रिपोर्ट्स में भी इन क्षेत्रों में त्वचा रोग, लीवर और कैंसर के मामले बढ़े है।

यह अनेक गांवों की स्थिति

  • बडगांव में हिंडन किनारे बसे गांव अंबेहटा चांद, भगवानपुर, टपरी, सांवतखेडी, शब्बीरपुर, नूनाबडी, बेलडा, महेशपुर, शिमलाना, चिराऊं, रतनहेडी, नन्हेडा खुर्द , पीपलो व बडाबांस आदि गांवों में नलों का पानी पीने लायक नही रहा है। इन गांवों में नदी में बहता पानी ही नही भूजल स्तर भी खराब हो रहा है। इन गांवों में कैंसर, पीलिया जैसी जानलेवा बीमारियों ने इन गांवों में दो सौ से भी अधिक मौत हो चुकी हैं।
  • गागलहेड़ी के हिंडन किनारे बसे हरोडा अहतमाल व हरोडा मुस्तहकम में पिछले दस वर्षों में कैंसर से मरने वालों की संख्या 50 से अधिक हो चुकी है। मक्काबाँस में भी तीन ग्रामीणों की कैंसर से मौत हो चुकी है। जबकि एक कैंसर मरीज का इलाज चल रहा है। गागलहेड़ी में भी कैंसर के सात एक्टिव मरीज है।
  • पठेड में यमुना खादर क्षेत्र में वाटर लेवल बहुत ऊपर आ जाने की वजह से गांव में हेड पंप का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। गांव दौलतपुर, टोडरपुर, नथमलपुर, रघुनाथपुर, धौलाहेड़ी, बरथा कायस्थ, रावण पुर सहित दर्जनों गांव में वाटर लेवल बहुत ऊपर आ गया है दूषित जल के कारण जल जनित बीमारियां फैल रही है। अकेले रघुनाथपुर गांव में ही पिछले दो सालों में आठ व्यक्तियों की कैंसर से मौत हो चुकी है और काफी संख्या में लोग बीमार है।
  • ननौता से होकर गुजर रही कृष्णा नदी के प्रदूषित पानी से गांव भनेड़ा खेमचंद की लगभग 3500 की आबादी प्रभावित है। श्यामवीर कर्मवीर सिंह, विक्रम सिंह व एडवोकेट कुलदीप सिंह आदि का कहना है कि विगत पांच वर्षों के दौरान यहां दो दर्जन से अधिक लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है तथा सैकड़ों लोग चर्म रोग, एलर्जी व गुर्दा रोग सहित विभिन्न गंभीर रोगों की चपेट में हैं।


नदियां कर रही भूजल दूषित

जिले के अनेक क्षेत्रों में प्रदूषित नदियां भूजल दूषित करने में कसर नहीं छोड़ रही है। नदियों में औद्योगिक अपशिष्ट शुगर मिल्स, डिस्टिलरी, पेपर मिल्स, स्लाटरहाउस, डाइंग यूनिट्स, टेक्सटाइल और केमिकल फैक्टरियों से अनुपचारित रासायनिक अपशिष्ट सीधे नदी में डाला जाता है। इसमें भारी धातु क्रोमियम, लेड, कैडमियम, डाई और विषाक्त रसायन शामिल हैं, जो पानी को जहरीला बनाते हैं।

इसके अलावा शहरों और गांवों से निकला सीवेज बिना ट्रीटमेंट के नालों के माध्यम से नदी में गिर रहा है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की कमी के कारण बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड स्तर बहुत ऊंचा हो जाता है, जिससे पानी में आक्सीजन खत्म हो जाती है और जलीय जीवन मर जाता है। यही नहीं खेतों से उर्वरक, कीटनाशक और अन्य रसायन बारिश के साथ नदी में बह जाते हैं जिससे भूजल दूषित होता है।

समस्या निदान की होती रही है खानापूरी

जिले के विभिन्न ब्लाक के गांवों में वर्षों से जलजनित बीमारियां फैली है, पूर्व सरकार से लेकर वर्तमान सरकार में भी कई बार इन गांवों में कैंसर से हो रही मौतों पर अंकुश लगाने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा सरकार से मांग की गई।

हाल में ही देहात विधायक आशु मलिक ने इस मसले को प्रमुखता से उठाया उसके बाद शासन द्वारा सैंपल लेने को टीम गठित की तथा गांवों में स्वास्थ्य कैंप लगाए जा रहे है लेकिन दषित हो चुके भूजल की रोकथम के लिए कोई पहल नहीं की गई है। सीवेज से लेकर रसायनिक अपशिष्ट आज भी नदियों में खुला बहाया जा रहा है।
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