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West Champaran: नरकटियागंज का ऑक्सीजन प्लांट बना शोपीस, चूहों ने कुतर दिए तार

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जागरण संवाददाता, नरकटियागंज। जब जब कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट जारी करता है, तब-तब आपदा से निपटने की तैयारियों पर जोर दिया जाता है। ऐसे समय में अनुमंडल अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन नरकटियागंज में यह व्यवस्था कागजों और निरीक्षण तक ही सीमित रह गई है। ह

कीकत यह है कि कोविड के दौरान पीएम केयर फंड से लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट वर्षों से बंद पड़ा है और धीरे-धीरे बर्बादी की ओर बढ़ रहा है। बीते 27 जून को नरकटियागंज अनुमंडल अस्पताल में स्थापित पीएसए ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट को फंक्शनल बनाने के उद्देश्य से पटना से दो टेक्नीशियन पहुंचे थे।

जांच के दौरान पाया गया कि प्लांट का इलेक्ट्रिक वायर पूरी तरह डैमेज हो चुका है। टेक्नीशियन ने एक-एक तकनीकी बिंदु की बारीकी से जांच की और इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ले गए। साथ ही पीएसए संचालन में आई तकनीकी कमियों की एक रिपोर्ट अस्पताल प्रशासन को भी सौंपी।

बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग की सपोर्टिंग एजेंसी बीएमएसआईसीएल द्वारा ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी अग्रवाल ट्रेडिंग कॉरपोरेशन को दी गई है। कंपनी के टेक्नीशियन ने एक माह के भीतर वायरिंग समेत अन्य गड़बड़ियों को ठीक कर प्लांट को चालू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन छह माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई काम शुरू नहीं हो सका है।

बता दें कि 2021 में कोरोना काल के दौरान यहां ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित किया गया था। शुरुआत में इसका ट्रायल भी हुआ, लेकिन प्रशिक्षित टेक्नीशियन के अभाव और नियमित संचालन नहीं होने के कारण प्लांट यूं ही पड़ा रह गया। लंबे समय से बंद रहने के कारण चूहों ने इसके इलेक्ट्रिक वायर तक कुतर दिए हैं।

इतना ही नहीं, चीनी मिल की ओर से अस्पताल परिसर में लगाया गया दूसरा ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट भी कई वर्षों से बंद पड़ा है। उसका गेट बंद है और अब तक उसका ट्रायल तक नहीं किया गया।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि कई बार निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है। कोरोना के संभावित खतरे के बीच अपेक्षित ऑक्सीजन प्लांट व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।


बीते साल मई में पटना से पहुंचे टेक्नीशियन ऑक्सीजन प्लांट की जांच किए थे, लेकिन उसके बाद कोई काम नहीं हुआ। इसके लिए जिला को लिखा गया है। - विपिन राज, प्रबंधक, अनुमंडल अस्पताल
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