गौतम कुमार मिश्रा, पश्चिमी दिल्ली। यह अपने आप में किसी आश्चर्य से कम नहीं है कि देश की सबसे बड़ी जेल तिहाड़ में एक ओर क्षमता से दो गुना कैदी हैं तो अधिकारियों की तैनाती स्वीकृत पदों से भी कम। कैदियों की संख्या और अधिकारियों की संख्या के बीच के इस असंतुलन को कब तक और कैसे पाटा जाएगा, यह जेल के किसी अधिकारी को नहीं पता है।
बहरहाल अधिकारी काम के बोझ तले दब रहे हैं। इन सभी का असर जेल की निगरानी प्रणाली पर पड़ना लाजिमी है। सबसे बड़ी बात यह है कि उच्च पद पर अधिकारियों की कमी से नीतिगत निर्णय का काम प्रभावित होता है। इसमें जेल का विस्तार, नए परिसर का निर्माण, कैदियों से जुड़ी सुविधाएं सहित अनेक बातें शामिल हैं।
एक अधीक्षक पर दो जेलों की जिम्मेदारी
नियम के हिसाब से एक जेल की देखरेख की कमान एक अधीक्षक के हाथ होनी चाहिए। इसे देखते हुए तिहाड़ की सभी 16 जेलों के लिए 16 जेल अधीक्षक के पद का प्रॉवधान है। लेकिन हकीकत में यह आदर्श स्थिति बेहद कम ही नजर आती है।
अभी की बात करें तो तीन जेल ऐसे हैं जहां अधीक्षक का कार्यभार किसी और जेल के अधीक्षक के जिम्मे है। तिहाड़ की सर्वाधिक महत्वपूर्ण जेल संख्या दो व सात के अधीक्षक की जिम्मेदारी एक ही अधीक्षक संभाल रहे हैं। इसी तरह जेल संख्या 12 व 15 का कामकाज एक ही अधीक्षक देख रहे हैं।
तिहाड़ की दो महिला जेलों की जिम्मेदारी एक अधीक्षक संभाल रही है। इस मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि महिला जेल संख्या छह तिहाड़ परिसर में तो महिला जेल संख्या 16 मंडोली जेल परिसर में है। दोनों जेलों के बीच कई किलोमीटर का फासला है। इतना ही नहीं कई जेल अधीक्षक को जेल के कामकाज के साथ मुख्यालय का भी कामकाज देखना पड़ रहा है।
डीआईजी एक, परिसर दो
नियम के मुताबिक तिहाड़ परिसर व मंडोरी परिसर की जेलों की देखरेख के लिए उप महानिरीक्षक यानि डीआईजी रैंक के दो अधिकारियों की तैनाती होनी चाहिए। डीआईजी की जिम्मेदारी संबंधित परिसर के जेल अधीक्षकों के कामकाज की पर्यवेक्षण की है।
लेकिन अभी तिहाड़ व मंडोली परिसर के लिए मात्र एक डीआईजी नियुक्त है। डीआईजी कुलदीप सिंह तिहाड़ के साथ मंडोली परिसर का भी कामकाज संभाल रहे हैं।
नए महानिदेशक को लेकर हो रही चर्चा
वर्तमान जेल महानिदेशक इस महीने के अंत में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनकी जगह जेल प्रशासन की कमान किसके हाथ में होगी, अभी इस पर जेलकर्मियों में चर्चा है। नाम न छापने की शर्त पर जेलकर्मी बताते हैं कि नया महानिदेशक जो भी हो, वह लंबे समय तक कार्यरत रहे, तो बेहतर है। वर्तमान महानिदेशक का कार्यकाल काफी संक्षिप्त रहा, ऐसे में नीतिगत निर्णय का काम प्रभावित हो रहा है।
जेल एक नजर में
- दिल्ली में जेलों की संख्या-16
- जेल परिसर- तिहाड़, रोहिणी व मंडोली
- कैदियों की कुल-19,814
- जेलों की कुल क्षमता-10,026
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